सभी से कर रहे संपर्क, करेंगे काउंसलिंग
मेडिकल कॉलेज के डॉ. उबैश अशरफ ने बताया कि ब्लड बैंक में जांच के दौरान 150 लोगों में हेपेटाइटिस की पुष्टि हुई। उन्हें अब वापस अस्पताल आकर उपचार लेने के लिए संपर्क किया जा रहा है। जागरूकता के लिए हर साल 28 जुलाई को विश्व हेपेटाइटिस दिवस मनाते हैं। इस साल सोमवार को इस दिवस पर एक कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है जिसमें ऐसे लोगों के लिए बकायदा काउंसलिंग की व्यवस्था रखी गई है। उन्होंने कहा कि हेपेटाइटिस बी और सी का वायरस कई बार वर्षों तक शरीर में बिना लक्षण के मौजूद रहता है। मरीज को सामान्य कमजोरी या कोई परेशानी भी महसूस नहीं होती। इसी कारण अधिकांश लोगों को बीमारी का पता तभी चलता है, जब रक्तदान, ऑपरेशन या किसी अन्य जांच के दौरान स्क्रीनिंग होती है। यदि समय रहते इलाज नहीं कराया गया तो यही संक्रमण आगे चलकर लिवर को स्थायी नुकसान पहुंचा सकता है।
लाखों खर्च के बाद भी नहीं बच सके चंदन
कॉलेज के दिनों में रक्तदान शिविर में चंदन (42) को हेपेटाइटिस का पता चला था, लेकिन उन्होंने न इलाज कराया और न नियमित जांच कराई। करीब 20 साल तक वे सामान्य जीवन जीते रहे। 2024 में आंखों की समस्या के बाद स्टेरॉयड उपचार शुरू हुआ और बाद में टीबी भी हो गई। जब हालत बिगड़ी तो जांच में हेपेटाइटिस से लिवर को गंभीर नुकसान का पता चला। डॉक्टरों ने लिवर प्रत्यारोपण की सलाह दी। जून से नवंबर 2025 के बीच अपोलो और मैक्स अस्पताल में करीब 28 लाख रुपये खर्च हुए, लेकिन उनकी जान नहीं बच सकी।
(जैसा कि चंदन की पत्नी चंचल ने बताया। अंत में उन्होंने कहा, अगर उस समय इलाज करा लिया होता और नियमित निगरानी करते तो शायद आज वे हमारे बीच होते।)
क्या है हेपेटाइटिस?
हेपेटाइटिस यकृत (लिवर) में होने वाली सूजन है। इसके पांच प्रकार ए, बी, सी, डी और ई हैं। इनमें हेपेटाइटिस बी और सी सबसे गंभीर माने जाते हैं, क्योंकि समय पर इलाज न मिलने पर ये लिवर सिरोसिस, लिवर फेलियर और लिवर कैंसर का कारण बन सकते हैं।
कैसे फैलता है?
- दूषित पानी और भोजन
- संक्रमित रक्त
- असुरक्षित सुई
- असुरक्षित यौन संबंध
- संक्रमित मां से बच्चे में
लक्षण
- बुखार
- कमजोरी
- भूख कम लगना
- उल्टी या दस्त
- पेट दर्द
- गहरे रंग का पेशाब
- आंखों या त्वचा का पीला पड़ना (पीलिया)।