कोरोना काल में रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है। हालांकि, अनलॉक हो गया है लेकिन जिंदगी पटरी पर नहीं लौट पा रही है। जरूरतें पूरी करने के लिए इधर-उधर हाथ-पांव मारने पड़ रहे हैं। ऐसे ही हैं अंतरराष्ट्रीय धावक संदीप पाठक, जो कोरियर बांटने को मजबूर हैं, क्योंकि छह महीने से स्टेडियम बंद है और खेल गतिविधियां भी ठप हैं।
संदीप ने बताया कि आर्थिक तंगी के चलते कोरियर बांटने का काम कर रहा हूं। कोरोना की वजह से खेलकूद गतिविधियां ठप हैं। कहीं खेल आयोजन नहीं हो रहे हैं। खेल कोटे से भर्तियां शुरू नहीं हो रही हैं। इसलिए, मजबूरन कोरियर बांटने की नौकरी करनी पड़ रही है, क्योंकि इससे कुछ आमदनी हो जा रही है और शारीरिक मेहनत भी।
संदीप ने कहा कि वर्ष 2013 में मंडल स्तर पर 400 मीटर दौड़ में स्वर्ण, 2015 में राज्य स्तर पर 400 मीटर व मिड रिले दौड़ में स्वर्ण, 2017 में राष्ट्रीय स्तर पर 400 मीटर दौड़ में स्वर्ण, इसी साल नेपाल में इंटरनेशनल चैंपियनशिप में 400 मीटर दौड़ में स्वर्ण सहित रजत पदक जीत चुका हूं। संदीप लोधा ब्लॉक के गांव बादबावनी के निवासी हैं।