जिला पुलिस और क्रिमिनल इंटेलिजेंस विंग (देहात) की संयुक्त टीम ने नकली करेंसी के काले कारोबार के खिलाफ बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने एक अंतरराज्यीय गिरोह के सरगना समेत चार अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से कुल 7,70,000 रुपये की नकली करेंसी बरामद की गई है। यह गिरोह उत्तर प्रदेश, दिल्ली और उत्तराखंड जैसे राज्यों में सक्रिय था।
बुधवार को पुलिस लाइन के सभागार में पत्रकार वार्ता में एसपी ग्रामीण मनीष मिश्रा ने बताया कि थाना गोरई पुलिस और इंटेलिजेंस विंग को सूचना मिली थी कि नकली नोटों की तस्करी करने वाला एक गिरोह क्षेत्र में सक्रिय है। योजनाबद्ध तरीके से की गई घेराबंदी के दौरान पुलिस ने थाना गोरई क्षेत्र (अलीगढ़) और ख्याला (नई दिल्ली) से चार आरोपियों को गिरफ्तार किया।
पकड़े गए आरोपियों में जिकरूल हसन (गैंगलीडर) शामिल है, जो मूल रूप से अलीगढ़ के भुजपुरा का रहने वाला है। वर्तमान में वह कासगंज में रह रहा था। इसके अलावा रघुवीर नगर, ख्याला, नई दिल्ली निवासी वसीम, कासगंज के गांव सेवनपुर निवासी आसिफ, दिल्ली के ख्याला में विष्णुपुरी का फरमान शामिल है।
गिरोह के सरगना जिकरूल हसन के पास से 6,20,000 रुपये के जाली नोट बरामद हुए। वहीं, अन्य तीन आरोपियों वसीम, आसिफ और फरमान की निशानदेही पर 1,50,000 रुपये की नकली करेंसी जब्त की गई।
कई राज्यों में दर्ज हैं मुकदमे
पकड़ा गया गिरोह काफी समय से इस धंधे में लिप्त है। मुख्य आरोपी जिकरूल हसन पर अलीगढ़ के देहलीगेट और रोरावर थानों समेत उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में भी जालसाजी के गंभीर मामले दर्ज हैं।
गिरोह के अन्य सदस्यों, वसीम और आसिफ का भी पुराना आपराधिक रिकॉर्ड रहा है, जिसमें उत्तराखंड में दर्ज नकली करेंसी के मामले शामिल हैं। इस मामले में थाना गोरई नकली करेंसी से संबंधित अपराध के तहत रिपोर्ट दर्ज की गई है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इन नकली नोटों की छपाई कहां हो रही थी और इस नेटवर्क के तार और किन-किन शहरों से जुड़े हैं।