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जेल जाने से बच गए थे निर्दोष, लाइन हाजिर हुए थे कोतवाल

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अभिषेक शर्मा
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सोफा के प्रधानपति कालीचरन की हत्या जेल में निरुद्ध उसके गांव के ही अपराधी अमन ने सुपारी देकर कराई थी। यह बात बुलंदशहर में मुठभेड़ में गिरफ्तार अपराधी पवन गुर्जर ने साफ कर दी थी। इसके बावजूद तत्कालीन खैर कोतवाल विनोद कुमार मिश्रा निर्दोष नामजदों को जेल भेजने पर या जेल भेजने की धमकी देकर लाभ लेने पर तुले थे। इसी मंशा से एक नामजद व कुछ के परिवार को हिरासत में लेकर थाने बैठा दिया था। खबर जब तत्कालीन एसएसपी तक पहुंची तो इंस्पेक्टर को अपने दफ्तर बुलाकर सार्वजनिक तौर पर नाराजगी जाहिर करते हुए लाइन हाजिर कर निर्दोषों को जेल भेजने से बचाया था।
सीओ ने एसएसपी को भेजी यह रिपोर्ट
नोएडा में बदमाशों की गिरफ्तारी के बाद जब यह सवाल खड़ा हुआ कि क्या उस समय हत्या में निर्दोषों को जेल भेजा गया था तो सीओ खैर ने इस मामले में विस्तृत रिपोर्ट एसएसपी को भेजी है। जिसमें बताया गया है कि इस हत्या में ऊधम सिंह, दलवीर सिंह, अजीत, पंकज, संजीत व मनोज नामजद किए गए थे। मगर 12 अक्तूबर 2010 को बुलंदशहर पुलिस ने पवन गुजर निवासी फुलवार अलवर राजस्थान को गिरफ्तार किया तो उसने स्वीकारा कि अमन ने सुपारी देकर यह हत्या कराई है। इस हत्या में उसके साथ रोहित व सौरभ थे। इस पर विवेचक ने पवन को बी वारंट पर तलब किया था। सुपारी देने वाले अमन को भी तलब किया। बाद में विवेचना इंस्पेक्टर के बदले जाने पर धर्मेंद्र सिंह पवार को मिली।
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उन्होंने जांच में पाया कि अमन से मिलने एक नामजद ऊधम सिंह भी भौड़सी जेल जाता था। अमन ने पुलिस बयान में स्वीकारा कि उसने खुद अपनी रंजिश में पवन गुर्जर, सौरभ व रोहित से यह हत्या कराई है। उसे ऊधम सिंह ने भी एक लाख रुपये देकर मदद की है। इस आधार पर विवेचक ने पवन व अमन के खिलाफ 23 जनवरी को न्यायालय में चार्जशीट पेश कर दी। बाकी नामजदों के नाम निकालते हुए सौरभ, रोहित व ऊधम सिंह के खिलाफ जून माह में विवेचक ने अदालत से गैर जमानती वारंट प्राप्त किए। मगर गिरफ्तारी नहीं हो सकी। इस मामले में एसपी क्राइम डॉ. अरविंद ने बताया कि धर्मेंद्र पवार के बाद अनूप सिंह व शंभूनाथ खैर में इंस्पेक्टर व मुकदमे के विवेचक रहे। जो आरोपियों के नाम साफ हो जाने के बाद भी उनकी गिरफ्तारी न कर सके।
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- यह बात सही है कि नोएडा में गिरफ्तार बदमाशों ने कालीचरन की हत्या स्वीकारी है। मगर रिकार्ड खंगालने से साफ हो गया है कि किसी निर्दोष को पूर्व में जेल नहीं भेजा गया। हां, नाम सामने आने पर भी उन्हें गिरफ्तार न कर पाने वाले विवेचकों पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी। इस मुकदमे में पवन व अमन पहले से जेल में हैं। दो अब गिरफ्तार हो गए। तीसरे ऊधम को लेकर थाना पुलिस कार्यवाही कर रही है।
-मुनिराज जी एसएसपी
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