डायरिया से पीड़ित दो मासूमों को अस्पताल में उपचार के लिए लाया गया था। जिसमें से एक की मौत हो गई। मौत किन कारणों से हुई इसकी जांच कराई जाएगी। इसके लिए टीम गठित की जाएगी।-डॉ. जगवीर सिंह वर्मा, सीएमएस, जिला अस्पताल
डायरिया से पीड़ित बच्चे में नमक-पानी की कमी होती है। ऐसे में सबसे पहले उन्हें भर्ती कर ड्रिप चढ़ाना चाहिए। इससे नमक और पानी की कमी पूरी होगी। अस्पताल में हुई घटना दुर्भाग्य पूर्ण है। अगर बच्चे को उल्टी दस्त हो रहा है तो ओआरएस का घोल नियमित रूप से पिलाते रहें। इससे बच्चे में कमजोरी नहीं आएगी।-डॉ. विभव वार्ष्णेय, बाल रोग विशेषज्ञ
जिला अस्पताल में लाई गई नूर फातिमा के आखिरी पलों में क्या हुआ
- दोपहर 1 बजे- नूर फातिमा और उसके भाई को परिवार वाले जिला अस्पताल लाए, ओपीडी में पहुंचे
- दोपहर 1.05 बजे - ओपीडी के कक्ष संख्या 7 में एक स्टाफ कर्मी ने आभा आईडी के बारे में पूछा। जब परिवार वालों ने कहा कि नहीं है तो कहा गया कि पर्चा बनवा लाएं। पर्चे की प्रक्रिया जानी।
- दोपहर- 1.10 बजे- नूर फातिमा की मां फरीन पर्चे के लिए लाइन में लग गई।
- दोपहर 1.25 बजे - नूर फातिमा को तेज उल्टी होने लगीं। लाइन में लगी फरीन से लोगों ने कहा पर्चा छोड़ो इमरजेंसी में लेकर पहुंचो।
- दोपहर 1.30 बजे - फरीन बेटी नूर फातिमा और बेटे उजैद को लेकर इमरजेंसी पहुंची। यहां पर इलाज शुरू हुआ। इलाज शुरू होने के कुछ मिनटों के अंदर ही नूर फातिमा ने दम तोड़ दिया।
जिले में बढ़ रहे डायरिया के मरीज
बारिश के मौसम में डायरिया के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। मलखान सिंह जिला अस्पताल, पंडित दीनदयाल संयुक्त चिकित्सालय की ओपीडी में रोजाना लगभग 60 डायरिया पीड़ित लोग पहुंच रहे हैं। इन अस्पतालों के डॉक्टर मरीजों और तीमारदारों को दूषित पेयजल और बाहर का खाद्य पदार्थ प्रयोग नहीं करने की सलाह दे रहे हैं। जिला अस्पताल के सीएमएस ने बताया कि बारिश में उमस और गर्मी बढ़ने पर डायरिया का खतरा बढ़ता है।