पंजाब प्रांत के मुक्तसर में सात दिन पूर्व पटाखा फैक्टरी में हुए विस्फोट में घायल दो युवक अपने गांव सफेदपुरा में लौट आए। हादसे में गांव के तीन युवकों की मौत हो गई थी। घायलों को पंजाब सरकार द्वारा बस से अलीगढ़ भेजा, जहां से परिजन उन्हें गांव लेकर आए। घायल युवक हादसे की याद कर आज भी सिहर जाते हैं।
तीन मंजिला भवन में थे 45 मजदूर, नहीं थी सीढ़ियां
घायल रामवीर और बहादुर ने बताया कि फैक्ट्री में लगभग 45 युवक काम करते थे, जिनके रहने की व्यवस्था भी फैक्टरी के अंदर बनी तीन मंजिला इमारत में थी। इमारत में कोई पक्की सीढ़ी नहीं थीं। बांस की सीढ़ियों से ही ये मजदूर ऊपर नीचे आते जाते थे। आग लगने पर लोगों को बाहर निकलने का मौका नहीं मिला।
500 रुपये देकर घर भेजने की कह रहा था फैक्टरी मालिक..
घायल बहादुर ने बताया कि घटना वाली रात उसकी रात्रि ड्यूटी थी । रात 12 बजे करीब जब वह नहाने लगा तभी ये हादसा हुआ। फैक्टरी मालिक शवों को बिना कार्रवाई रात में ही उनके घर भेजने और घायलों को 500 - 500 रुपये देकर वापस भेजने के लिए बोल रहा था। बहादुर ने पुलिस को सूचना दी जिसके बाद घायलों को अस्पताल भिजवाया।
मृतकों के परिजनों को मुआवजा बढ़वाने की मांग
हादसे में गांव के नीरज, राहुल और दानवीर की मौत हो गई थी। पंजाब सरकार ने मृतकों के परिजनों को दो दो लाख रुपये का मुआवजा देने की घोषणा की थी। इसे बढ़वाने की मांग की जा रही है।