इत्र बनाने के लिए प्रयोग किया जाने वाला बेसिक तेल और उसमें मिलाई जाने वाली मुख्य खूशबू महंगी हो गई है। जिससे इत्र की कई किस्में महंगी हुई है और इनकी मांग कुछ कम हुई है। एक साल पहले तक सावन के सोमवार, नागपंचमी, रक्षाबंधन और जन्माष्टमी के मौके पर इत्र की जो मांग थी, वो इस बार नहीं हो रही है। इस महंगाई का असर धूपबत्ती, अगरबत्ती और अन्य उत्पादों पर भी पड़ रहा है।
इत्र के थोक कारोबारी कुलदीप सैनी कहते हैं कि पहले बेसिक तेल 160 रुपये लीटर में आता था, जो अब बढ़ कर 240 रुपये लीटर तक पहुंच गया है। इसमें 80 रुपये का बड़ा इजाफा हुआ है। इसी तरह से अलग-अलग इत्रों की खूशबू 50000 रुपये लीटर तक मिल रही थी, जो पहले 60000 और अब 70000 रुपये लीटर तक पहुंच गई है। इसे बाजार में रूह के नाम से भी जाना जाता है। इसकी दो-तीन बूंदों से ही खूशबूदार इत्र की पूरी शीशी तैयार हो जाती है। पोशाक और इत्र विक्रेता विकास कहते हैं कि महंगाई का असर इत्र की मांग पर पड़ा है। मांग कुछ कम हो रही है।
दोनों के दाम बढ़ने से इत्र, धूपबत्ती और अगरबत्ती बनाना महंगा हो रहा है। उन्होंने बताया कि अलीगढ़ और हाथरस में इसका काम करने वाले कारोबारी इससे प्रभावित हुए हैं। बता दें कि अलीगढ़ में बेला, गुलाब, रजनीगंधा, कदंब, लेमन मिस्ट, संदल, चंदन, चमेली, कस्तूरी, रूद्राक्ष इत्र की मांग सर्वाधिक होती है।