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सैनिकों की शहादत पर गुस्सा, चीन को करारा जवाब दिया जाए

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रामलीला मैदान पर चाइने के आइटम का विरोध करते अरुणोदय फाउंडेशन के पदाधिकारी। - फोटो : CITY OFFICE
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सीमा पर चीनी सेना के साथ झड़प के बाद युवाओं का खून खौल रहा है। यहां के युवा चीन को करारा जवाब देने के पक्ष में हैं। वीरगति प्राप्त सैनिकों को शहरवासियों ने श्रद्धासुमन अर्पित किया। चीनी वस्तुओं का बहिष्कार कर उसकी आर्थिक कमर तोड़ने के लिए लोग अभियान भी शुरू कर चुके हैं।
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स्वदेशी जागरण मंच के प्रदेश संपर्क प्रमुख डॉ. राजीव अग्रवाल ने कहा कि चीन, पाकिस्तान और नेपाल का अवैध गठबंधन भारत के लिए गंभीर चुनौती है। जनता हर परिस्थितियों का सामना करने के लिए तैयार है। चीनी सामान का बहिष्कार कर उसका आर्थिक कमर तोड़ने का आह्वान जनता से किया है। विशाल देशभक्त ने कहा कि चीन सरहद पर मक्कारी से बाज नहीं आ रहा है। चीनी सेना को जवाब देने में भारतीय सेना समर्थ है। उन्होंने शहीद सैनिकों के प्रति श्रद्धासुमन अर्पित किया है। डीएस कॉलेज के छात्र नेता हर्षद वार्ष्णेय ने कहा कि चीन की भलाई इसी में है कि अपनी सेना पीछे कर लें। यह मोदी युग है, इसको चीन भूल गया है।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के प्रदेश विशेष आमंत्रित सदस्य डॉ. पुष्पेंद्र पचौरी ने कहा कि भारत नेहरू की गलतियों की सजा भुगत रहा है। हमें चीन को मुंहतोड़ जवाब देना चाहिए। हमें चीनी सामानों का बहिष्कार करना चाहिए। संस्कार भारती के जिला संयोजक भुवनेश वार्ष्णेय आधुनिक ने कहा है कि भारत चीन सीमा पर जांबाजों के शहीद होने पर देश में गुस्से की लहर है। अब चीन को सबक सिखाने का वक्त आ गया है। अलीगढ़ हेल्प लाइन के संस्थापक राज सक्सेना ने कहा कि कोरोना का गुनहगार चीन अपना पाप छिपाने के लिए युद्ध वाली चाल चल रहा है। अब भारत 1962 वाला भारत नहीं है। अपनी एक इंच जगह छोड़ने वाला नहीं है। उन्होंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया है कि चीन को मुंहतोड़ जवाब दिया जाए कि फिर कोई भी देश भारत की तरफ आंख उठाने की हिम्मत न करें।
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