अलीगढ़। कोरोना लाक डाउन के दौरान दूसरे प्रदेशों से बड़ी संख्या में आ रहे प्रवासी श्रमिक राशन वितरण व्यवस्था के लिये चुनौती बन गये हैं। पिछले एक माह में ही 6105 राशन कार्ड धारक परिवार एवं 28028 उपभोक्ता बढ़ गये हैं। इसके चलते पूर्ति विभाग को 1401.4 क्विंटल चावल अतिरिक्त बांटना पड़ा है। राशन कार्ड धड़ाधड़ बन रहे हैं, ऐसे में अफसरों की चिंता यह है कि अगले माह राशन वस्तुओं की कितनी डिमांड भेजे कि सभी उपभोक्ताओं को राशन मिल जाये। कोरोना लाक डाउन में फैक्ट्रियां बंद होने के बाद से दूसरे प्रदेशों में फंसे प्रवासी श्रमिक अपने घर वापस लौट रहे हैं। अलीगढ़ में ही एक अप्रैल से अब तक करीब 9 हजार से अधिक श्रमिक अपने परिवार समेत वापस लौट आये हैं। शासन इन श्रमिकों के पुनर्वास एवं इनकी खानपान संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति के प्रति गंभीर है। निर्देश हैं कि इन सभी के राशन कार्ड बनवाकर इन्हें खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाय। लेकिन श्रमिकांे के लगातार आगमन के चलते पूर्ति विभाग का गणित लगातार गड़बड़ा रहा है। पिछले दो माह के आंकड़े इसके स्पष्ट गवाह हैं। अप्रैल माह में जहां 611992 कार्ड धारक थे और उपभोक्ता संख्या 2490122 थी। जबकि मई में यह संख्या बढ़कर 618097 कार्ड धारक और 2518150 यूनिट तक पहुंच गई। यानि एक माह में ही 6105 कार्ड धारक एवं 28028 उपभोक्ता बढ़ गये। जिला पूर्ति अधिकारी चमन शर्मा ने स्वीकार किया कि प्रवासी श्रमिकों के लगातार आने और उनके तत्काल कार्ड बनाने के आदेशों से समस्या खड़ी हो गई है। नये कार्डों के हिसाब से राशन की भी व्यवस्था करनी है। यह तय करना मुश्किल हो रहा है कि शासन को कितनी डिमांड भेजी जाये, जो सभी को राशन मिल सके। ---------- पिछले माह बंटा 1401.4 क्विंटल अतिरिक्त चावल अलीगढ़। अप्रैल एवं मई में फ्री चावल वितरण के आंकड़े अफसरों की मजबूरी बयां करने के लिये काफी हैं। जहां अप्रैल माह में 124506.1 क्विंटल चावल का वितरण हुआ था वही मई माह में 125907.5 क्विंटल चावल का वितरण किया गया है। जो अप्रैल माह में वितरित हुए चावल से 1401.4 क्विंटल अधिक है। प्रति कार्ड एक किलो के हिसाब से इस माह 618097 किलो चना बंटा है। --- तीन हजार से अधिक कार्ड पेंडिंग अलीगढ़। अप्रैल से अब तक 6105 नये राशन कार्ड व 28028 उपभोक्ता बढे़ हैं। जबकि तीन हजार से अधिक राशन कार्ड बनने बाकी हैं, जो अभी प्रासिस में हैं। श्रमिक लगातार आ रहे हैं, ऐसे में इनके लिए राशन वस्तुओं का इंतजाम करना पूर्ति अफसरों के लिये सिरदर्द बना हुआ है।