शरई मसले में हुकूमत की दखलंदाजी से शहर मुफ्ती से लेकर मुस्लिम महिलाओं में गुस्सा है। मुस्लिम बुद्धिजीवियों का कहना है कि मुस्लिम महिलाओं को आत्मनिर्भर व सशक्त बनाने की बजाय हुकूमत शरई मसले में कुछ ज्यादा ही दिलचस्पी लेने लगी है, जो कि उनके खिलाफ साजिश है।
हाल ही में दो ताजा मामले सामने आए हैं। इनमें एक है 70 साल से अधिक उम्र वाले और चौथी बार लगातार हज के लिए आवेदन करने वाले अब सीधे आवेदन नहीं कर सकते हैं, बल्कि उन्हें केंद्र सरकार द्वारा गठित समिति की नई नीति के तहत अब कुर्रा (लॉटरी) का इंतजार करना होगा। इससे पहले इन आवेदकों को वरीयता के आधार पर हज पर जाने की मंजूरी मिल जाती थी। समिति ने मसौदा तैयार करके केंद्रीय अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी को सौंप दिया है।
कुरान-हदीस से साबित है कि महिला महरम (शौहर, बेटा, भाई, पिता आदि) के साथ हज पर जा सकती है। ऐसे में उसका अकेला जाना मुनासिब नहीं है। पता नहीं हुकूमत इस मसले पर इतनी दिलचस्पी क्यों दिखा रही है? - मोहम्मद खालिद हमीद, शहर मुफ्ती
जो चार साल से लगातार हज के लिए आवेदन कर रहा है, उसे तरजीह मिलनी ही चाहिए। मसौदा तैयार करने में अफसरों से चूक हुई है। हज के दौरान महिलाओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी प्रधानमंत्री स्वयं लें।
- मुफ्ती डॉ. जाहिद खान, एएमयू
महिला बिना महरम हज पर नहीं जा सकती। प्रधानमंत्री को महिलाओं की इतनी फिक्र है तो उनके लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, नौकरी में 50 फीसदी का आरक्षण दे दें। - अरशी जफर खान, सचिव, काउंसिल फॉर रिसर्च एंड इम्पावरमेंट ऑफ वूमेन