सरकारी क्रय केंद्रों पर सुविधाओं का अभाव एवं उपज का देरी से भुगतान का असर गेहूं की सरकारी खरीद पर पड़ा है। सरकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं खरीद करीब डेढ़ महीने से चल रही है लेकिन 1.69 लाख मीट्रिक टन के लक्ष्य के सापेक्ष अभी तक 1.94 प्रतिशत ही खरीद हो सकी है। अभी किसान बाजार में गेहूं का मूल्य बढ़ने का इंतजार कर रहे हैं।
एक अप्रैल से जिले के 106 क्रय केंद्रों पर गेहूं खरीद शुरू हुई थी। गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2015 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया गया था। सुविधाओं का अभाव एवं उपज के भुगतान में देरी के चलते उन्होंने सरकारी क्रय केंद्रों से दूरी बनानी शुरू कर दी और अपनी उपज लेकर सीधे बाजार पहुंचने लगे। इसका फायदा आढ़तियों और व्यापारियों ने उठाया। इसके अलावा, यूक्रेन संकट को देखते हुए स्थानीय व्यापारियों ने सरकारी कीमत से अधिक कीमत देकर खेत-खलियान व किसानों के घरों से ही गेहूं की खरीद लिया। जिले में गेहूं खरीद का सरकारी लक्ष्य 1.69 लाख मीट्रिक टन है। इसके सापेक्ष बृहस्पतिवार तक 3284 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा जा सका है, जो खरीद के लक्ष्य का मात्र 1.94 प्रतिशत है। जिला खाद्य विपणन अधिकारी राजीव कुलश्रेष्ठ ने बताया कि इस बार किसानों को बाजार में गेेेहूं का अच्छा मूल्य मिला है। अभी तक लक्ष्य के सापेक्ष बेेेहद कम खरीद ही हुई है। कोशिश जारी है कि किसान क्रय केंद्रों पर आएं।