अब्दुल करीम चौराहे पर होली को लेकर पिचकारी रंग गुलाल से सजी दुकानें
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रंगों के त्योहार होली पर सड़क पर गुलाल बरसेगा, आसमां में पतंग उड़ेंगी और शहर की फिजा में सौहार्द का रंग घुलेगा। अलीगढ़ प्रदेश के उन चुनिंदा जिलों में शुमार है, जहां होली पर पतंगबाजी की परंपरा है। अलीगढ़ में यह परंपरा इसलिए खास है, क्योंकि यह हिंदू-मुुस्लिम के बीच सद्भाव को बढ़ावा देती है। यहां हिंदू गुलाल उड़ाते हैं तो मुस्लिम पतंग उड़ाकर इस त्योहार को मनाते हैं। मुगलकाल में शुरू हुई यह परंपरा आज भी पूरे जोश और उत्साह के साथ बरकरार है। पुराने शहर के बाजारों में पतंग की दुकानें सज गई हैं। खरीदारी के लिए भीड़ उमड़ रही है।
हाथों-हाथ बिकीं योगी-मोदी की पतंग
योगी-मोदी के चित्र लगीं पतंगें भी इस बार बाजार में आईं। जिन्हें हाथों-हाथ लिया जा रहा है। बच्चों को लुभाने के लिए डोरेमोन, स्पाइडर मैन, छोटा भीम कॉर्टून छाप पतंग बाजारों में उपलब्ध हैं। इनकी कीमत 10 रुपये से लेकर 50 रुपये तक है।
प्रतिबंधित पतंग-मांझा की भी बिक्री
प्लास्टिक पन्नी की पतंगों और चाइनीज मांझे पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने रोक लगा रखी है। मगर, शहर में चोरी छिपे इन पतंगों को बनाया और बेचा जा रहा है। बाजार में चीन के मांझा की जबर्दस्त मांग है। इस मांझे को तेज धार और सस्ता होने के कारण अधिक खरीदा जा रहा है। बनारस-बरेली निर्मित कॉटन का मांझा की चरखी 500 से 1500 रुपये तक है। वहीं, चाइनीज मांझा की चरखी 300 से 800 रुपये की है।
तीन पीढ़ी से पतंग-मांझा के कारोबार
अब्दुल करीम चौराहा के पास पतंग की दुकान लगाने वाले विशाल अग्निहोत्री की खानदान की तीसरी पीढ़ी में से हैं, जो पतंग का कारोबार कर रहे हैं। विशाल बताते हैं कि उनके दादा राधाबल्लभ, फिर पिता मनोहर लाल और अब वह खुद पतंग की दुकान चला रहे हैं। अलीगढ़ में होली पर पतंगबाजी संप्रदाय सौहार्द की मिसाल है।
मो. नाजीम निवासी ऊपरकोट ने कहा कि त्योहार कोई भी हो हर किसी समुदाय को उसमें शरीक होना चाहिए। होली पर हम पतंग उड़ाकर इसका आनंद लेते हैं। हिंदू दोस्तों के साथ गुलाल भी उड़ाते हैं। मो. जाकिर निवासी शाहजमाल ने बताया कि बचपन से होली पर हिंदू और मुस्लिमों को एक साथ पतंग उड़ाते देखते आए हैं। दिन भर होली होती है शाम को पतंग उड़ाकर एकता की मिसाल पेश करते हैं।