छपैटी बाजार जहां दमकल की गाड़ी तक नहीं जा सकती ।
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दिल्ली के एक होटल और बिहार के अस्पताल में हाल ही में हुईं आग लगने की घटनाओं ने जिले में भी खतरे की घंटी बजा दी है। शहर के दर्जनों होटल, रेस्टोरेंट, अस्पताल और बहुमंजिला भवन आज भी अग्नि सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर संचालित हो रहे हैं। इनमें से अधिकांश के पास फायर एनओसी नहीं है और आग बुझाने के पर्याप्त इंतजाम भी नहीं हैं।
हैरानी की बात यह है कि पिछले 11 वर्षों में अग्निशमन विभाग सैकड़ों नोटिस जारी कर चुका है, लेकिन न तो भवन स्वामियों ने सुधार किया और न ही संबंधित विभाग कोई प्रभावी कार्रवाई कर सके। अग्निशमन विभाग ने ऐसे भवनों को चिह्नित करने के लिए एक बार फिर विशेष अभियान शुरू किया है।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार अधिकांश भवनों की ऊंचाई 15 मीटर से कम होने के कारण अग्निशमन विभाग सीधे कार्रवाई नहीं कर सकता। इस संबंध में एडीए सहित अन्य विभागों को भी पत्र भेजे जा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। मुख्य अग्निशमन अधिकारी मुकेश कुमार ने बताया कि शहर में 3635 भवन स्वामियों ने फायर एनओसी के लिए आवेदन किया है, जबकि होटल और रेस्टोरेंट श्रेणी में केवल 25 प्रतिष्ठानों के पास ही वैध एनओसी है।
हाल में प्राप्त 120 नए आवेदनों में से 11 को जांच के बाद निरस्त कर दिया गया। 100 से अधिक होटल, रेस्टोरेंट और अस्पतालों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं। विभागीय जांच में कई भवनों में फायर ब्रिगेड वाहन खड़ा करने की जगह तक नहीं मिली। धुआं निकासी, आपातकालीन निकास और अग्निशमन उपकरणों की भी गंभीर कमी पाई गई। संकरी गलियों में संचालित कई होटल और व्यावसायिक प्रतिष्ठान सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर चल रहे हैं।