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अपने डॉगी से है प्यार तो लाइसेंस से क्यों इन्कार

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पहले लखनऊ और अब गाजियाबाद की घटना के बाद पालतू श्वान सुर्खियों में हैं। खास बात यह है कि अलीगढ़ शहर में नगर निगम में बिना पंजीकरण या लाइसेंस लिए ही श्वान पाले जा रहे हैं। ऐसे में इन श्वानों के कानून तोड़ने पर कैसे लगाम लग सकेगी और कैसे कार्रवाई हो सकेगी, यह कुछ नहीं कहा जा सकता।
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नगर निगम रिकार्ड के अनुसार, 2012-13 में एक प्रतियोगिता के लिए 75 लाइसेंस लिए गए थे। इसके बाद से कोई नया लाइसेंस जारी नहीं हुआ है। हालांकि, इस संबंध में नियमावली बनी हुई है, जिसका बोर्ड में अनुमोदन होना शेष है।
पिछले दिनों लखनऊ में पिटबुल नस्ल के पालतू कुत्ते ने मालकिन पर हमला बोल दिया था, जिसमें उनकी मौत हो गई थी। इसी तरह गाजियाबाद में एक बच्चे को काटा, जिसके 150 टांके लगे हैं। इन घटनाओं के बाद सुप्रीम कोर्ट ने एक सुझाव दिया था कि शहर में लावारिस कुत्तों के टीकाकरण की व्यवस्था वे लोग करेंगे, जो उनको भोजन की व्यवस्था कराते हैं। अगर लावारिस श्वान किसी को काटते हैं तो उनके उपचार व मुआवजे की व्यवस्था की जाए।
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जिले में 11114 पालतू श्वान
नगर निगम ने वर्ष 2014-15 में पालतू कुत्तों के पंजीकरण के लिए श्वान पालकों को पत्र भेजा था, लेकिन एक भी पंजीकरण नहीं हो सका। हालांकि, पशुपालन विभाग में हुई पशु गणना के अनुसार, जिले में पालतू कुत्तों की संख्या जिले में 11114 है। नगर निगम के अनुसार, जिन लोगों ने अपने घरों पर कुत्ता पाल रखा है, उन्हें नगर निगम से लाइसेंस लेना जरूरी है। अगर वह लाइसेंस नहीं लेते हैं, तो उसे अवैध माना जाएगा। नगर निगम इसे जब्त भी कर सकता है। पालतू कुत्ते का लाइसेंस न होने पर पांच हजार रुपये के जुर्माने का प्रावधान है।
ये श्वान हैं पसंदीदा
पालकों को विदेशी नस्ल के श्वान ज्यादा पसंद आते हैं। इनमें लैब्राडोर, जर्मन शेफर्ड, बुलडॉग, टॉय ब्रीड (माल्टीज नस्ल), बीगल्स, गोल्डन रिट्रीवर, जैक रसेल टेरियर, पग, न्यू फाउंडलैंड, पूडल प्रजाति के कुत्ते शामिल हैं।
ये हैं विदेशी नस्ल के कुत्ते
- पिटबुल, रॉट वेल्लर, जर्मन शेफर्ड, डाबरमैन पिन्स्चर, बुलमास्टिफ, हस्की, मालाम्यूट, वोल्फ हाइब्रिड, बॉक्सर, ग्रेट डैन आदि। ये सभी कुत्ते बेहद आक्रामक माने जाते हैं।
- नगर निगम इस विषय पर नए सिरे से सर्वे व पॉलिसी तैयार कर रहा है, जिसके बाद शहर में नए सिरे से पालतू कुत्तों को लेकर लाइसेंस जारी किए जाएंगे और जो नहीं लेंगे, उन पर कार्रवाई होगी। लाइसेंस के समय ही सभी के टीकाकरण व उन्हें बिल्ला जारी करने की व्यवस्था होगी। इसी तरह लावारिस कुत्तों को लेकर एक सर्वे की तैयारी है।
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- अरुण कुमार गुप्त, अपर नगर आयुक्त।
ये हैं नियम
- श्वान पालक को 15 दिन के भीतर नगर निगम को देनी होगी सूचना
- प्रति वर्ष 31 मार्च को कराना होगा श्वान लाइसेंस का नवीनीकरण
- 50 रुपये प्रति दिन के अनुसार विलंब शुल्क भी कर रखा है निर्धारित
- पंजीकरण के समय देना होगा एंटी रैबीज टीकाकरण का प्रमाण पत्र
- सार्वजनिक स्थान पर गंदगी, लावारिस छोड़कर भ्रमण होगा प्रतिबंधित
- किसी व्यक्ति की शिकायत या गंदगी आदि पर होगी जुर्माने की कार्रवाई
- नगर निगम के पास ही लाइसेंस निरस्तीकरण का अधिकार रहेगा
- श्वान द्वारा किसी को काटने पर स्वामी पर कार्रवाई की जा सकेगी
ये है कानून
- पालतू कुत्ते के काटने से मौत पर मालिक पर दर्ज हो सकता है धारा 429 के तहत मुकदमा। पांच साल की सजा व पांच हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान।
- पालतू कुत्ते के काटने से जख्मी होने पर मालिक पर दर्ज हो सकता हहै धारा 289 के तहत मुकदमा। छह माह सजा व एक हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान।
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