नुमाइश में खजला, हलवा पराठा की बिक्री करते दुकानदार कुंवर पाल। सवांद
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नुमाइश में कई दशकों से आलू से बनने वाले बरूले, मीठा-नमकीन खजला और हलवा-पराठा का स्वाद सभी को लुभाता है। नुमाइश आने वाला हर व्यक्ति इनका स्वाद जरूर लेना चाहता है। इन दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ रहती है। ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले लोगों को ये ज्यादा पसंद आती हैं।
हरे धनिए की चटपटी चटनी के साथ स्वाद है लाजबाव
यूं तो शहर भर में आलू से बनने वाले बरूले का स्वाद लिया जा सकता है, लेकिन नुमाइश में इसका मजा बढ़ जाता है। हरे धनिए की चटपटी चटनी और गर्म बरूलों की कई दुकानें नुमाइश में हैं। सुबह से लेकर देर रात तक ग्राहकों की भीड़ इन दुकानों में रहती है। बरूले बेचने वाले एकांश के अनुसार दस रुपये में 100 ग्राम बरूले मिलते हैं। इसको बनाने के लिए छोटे आलू को मय छिलका उबाला जाता है। इसके बाद बेसन, अरारोट एवं मसालों का लेप लगा कर कढ़ाही में तला जाता है।
खजला एवं हलवा-पराठे की खुशूब से खिंचे चले आते हैं ग्राहक
नुमाइश में सबसे अधिक मांग मीठे एवं नमकीन खजले की देखने को मिलती है। बुलंदशहर के कस्बा डिबाई के रहने वाले दुकानदार कुंवरपाल एवं महेश कुमार ने बताया कि कम मीठा खजला 180 रुपये और अधिक मीठा 140 रुपये प्रतिकिलो है। नमकीन खजला 40 और 50 रुपये प्रति नग की दर से बिक रहा है। हलवा-पराठा 140 रुपये प्रति किलो है। खास बात यह है कि करीब ढाई फीट गोलाई का यह पराठा किलो के हिसाब से बिकता है। पराठा खस्ता होता है जिससे इसका स्वाद अलग ही आनंद देता है। जिससे लोग खिंचे चले आते हैं। लोग इन दुकानों पर पहुंचकर खजला के साथ ही हलवा- पराठा का स्वाद उठाते हैं। हलवा- पराठा की खुशबू अलग ही रहती है।