जो लोग महामारी के समय सोशल मीडिया पर भ्रामक और भड़काऊ सामग्री डाल रहे हैं, वह बहुत ही निंदनीय कार्य कर रहे हैं। उनके इस काम को किसी भी तरीके से माफ नहीं किया जाएगा। यह बात शनिवार को अमर उजाला फेसबुक लाइव के दौरान अलीगढ़ रेंज के डीआईजी डॉ. प्रीतिंदर सिंह ने कही।
उन्होंने कहा की कोई इस मुगालते में न रहे कि सोशल मीडिया पर वह कुछ भी अपलोड कर देगा और पकड़ में नहीं आएगा। हमारा सोशल मीडिया सेल बहुत एक्टिव है। ऐसे किसी भी काम को करने वाले को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा पुलिस लगातार लॉकडाउन का सख्ती के साथ पालन कराने के लिए घोषणा कर रही है। जिला और रेंज के वह इलाके, जिसकी गलियां बहुत संकरी हैं, वहां पर ड्रोन डिवाइस के साथ निगरानी की जा रही है। कुछ जगहों पर बैरियर लगाए गए हैं। इस तरह बेहद सख्ती के साथ जो सरकार की गाइडलाइन हैं, उनका पालन कराया जा रहा है। यही वजह भी है कि हम लोगों को इस महामारी से काफी हद तक सुरक्षित रखने में कामयाब भी हुए हैं। डीआईजी ने कहा लॉकडाउन का पालन कराने में पुलिस की सबसे बड़ी भूमिका है। लेकिन अकेले पुलिस विभाग द्वारा इसका पालन कराया जाना इतना सहज नहीं है। आम लोगों की यह जिम्मेदारी है कि वह पुलिस प्रशासन का सहयोग करें।
पुलिस कंट्रोल रूम पर हो रही हर तरह की सुनवाई
अगर, लॉकडाउन के दौरान किसी व्यक्ति को किसी प्रकार की आवश्यकता है या कोई समस्या है तो वह 100 नंबर या 112 नंबर पर कॉल करके हमें सूचित कर सकता है। हमारे सभी जिलों में इंटीग्रेटेड कंट्रोल रूम बने हुए हैं। उसमें सभी विभागों के अधिकारी बैठते हैं। किसी भी विभाग से संबंधित कोई समस्या मिलने पर उस विभाग के प्रतिनिधि को सूचना प्रदान कर दी जाती है और मदद मांग रहे व्यक्ति तक सहायता पहुंचाई जाती है। डीआईजी ने कहा कि लॉकडाउन में सबसे पहले हमें सप्लाई चैन को मेंटेन करना है।
घरों में लोगों को सभी आवश्यक चीजें मिलती रहें। दवाएं मिलती रहें। सब्जियां दूध आदि मिलता रहे। इस को सुनिश्चित करना भी हमारा दायित्व है। इसके बारे में हम फोर्स को लगातार ब्रीफ कर रहे हैं कि सोशल डिस्टेंसिंग को बनाए रखते हुए इन सभी की आपूर्ति सुनिश्चित कराई जाती रहे। पुलिस फोर्स को निर्देशित किया है कि वह लगातार ऐसे मामलों पर नजर रखें कि जिनमें कोई व्यक्ति संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आया हो और उस व्यक्ति से कोई संपर्क में आया हो तो उसको आइसोलेट किया जाए। उसके लिए समाज के संभ्रांत व्यक्ति के साथ संपर्क करके उन्हें विश्वास दिलाया जाए कि यह उनके ही हित में है ।
लॉकडाउन की शर्तों का सम्मान करें, दुरुपयोग कतई न करें
डीआईजी ने कहा कि जैसे-जैसे लॉकडाउन बढ़ रहा है, वैसे-वैसे ही लोगों की असहजता को भी समझा जा सकता है। इसी तरह शर्तों के साथ लॉक डाउन में कुछ राहत देने की तैयारी की जा रही है। लेकिन यह राहत बनी रहे इसकी जिम्मेदारी भी लोगों की है। अगर वह लॉक डाउन में राहत की शर्तों को गंभीरता से नहीं लेते हैं और संक्रमण के कुछ मामले सामने आते हैं तो यह राहत वापस भी ली जा सकती है। इसलिए नागरिकों का दायित्व है कि वह लॉक डाउन में दी गई राहत की शर्तों का सम्मान करें। उसका दुरुपयोग न करें। उन्होंने कहा कि लोग सुरक्षा उपाय गंभीरता के साथ अपनाएं। जब भी बाहर से आएं हाथ धोएं। सैनिटाइजर साथ रखें। अगर उनका इलाका सैनिटाइज नहीं हुआ है तो नगर निगम से संपर्क करें। योग या हल्की-फुल्की एक्साइज कर अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाएं। अच्छा खाना, पोषण पूरा लें। इस तरह अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर भी इस महामारी से बचाव किया जा सकता है।
हमारे पुलिसकर्मी सच्चे कोरोना वारियर्स
उन्होंने कहा कि हमारे पुलिसकर्मी सच्चे कोरोना वारियर्स हैं। चाहे बैंक की लाइन हो, मंडी में भीड़ हो या कहीं पर भी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराना हो, वह इस काम में लगे हुए हैं। लेकिन पुलिस कर्मियों से भी अपील है कि वह भी अपने घरों में जाएं तो सबसे पहले यूनिफार्म को बाहर उतारें। सभी तरह के सुरक्षा उपाय अपनाएं। इसके बाद ही अपने परिवार से मिले। पूरी उम्मीद है कि हम इस महामारी को पूरी तरह परास्त कर देंगे।
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रेंज में 1148 मुकदमे दर्ज, अलीगढ़ अव्वल
रेंज पुलिस द्वारा लॉकडाउन उल्लंघन पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। इस कड़ी में रेंज में अब तक 1148 मुकदमे दर्ज हुए हैं, सर्वाधिक मुकदमे दर्ज करने का रिकार्ड अलीगढ़ जनपद के नाम है। रेंज में अलीगढ़ ने अब तक सर्वाधिक 774 मुकदमे 1448 लोगों पर दर्ज किए हैं। इसके बाद नंबर एटा, हाथरस और कासगंज का आता है। इसी तरह वाहन चेकिंग के नाम पर चालान व जुर्माना वसूली लॉकडाउन के दौरान पुलिस ने रेंज में कुल 52 लाख 89 हजार रुपये वसूले हैैं, जिसमें सर्वाधिक वसूली 33 लाख 17 हजार रुपये की अलीगढ़ पुलिस ने की है। क्रिय बैरियर/चेकपोस्ट अलीगढ़ में 76, एटा में 52, हाथरस में 34 व कासगंज में 25 हैं।