शोध छात्र मन्नान वानी के आतंकी संगठन में शामिल होने की खबर के बाद एएमयू संस्थापक सर सैयद अहमद खान का एबीवीपी एवं भाजपाइयों द्वारा पुतला फूंके जाने से प्रख्यात इतिहासकार प्रो. इरफान हबीब बेहद खफा हैं। उन्होंने पलटवार किया कि बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में कुछ हो जाए तो क्या ये लोग उसके संस्थापक भारत रत्न पंडित मदन मोहन मालवीय का पुतला जलाएंगे।
मन्नान की घटना के बाद पुलिस प्रशासन द्वारा कश्मीर के छात्रों के मोबाइल नंबर चेक करने आदि की खबर मीडिया में आने व कश्मीर के छात्रों को टार्गेट किये जाने पर प्रो. इरफान हबीब ने एतराज जताया और कहा कि कश्मीर हमारा है तो कश्मीरी भी हमारे हैं। आखिर क्यों पूछा जा रहा है कि कश्मीरी कौन हैं। उनके साथ भेदभाव क्यों किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश या बिहार का लड़का यदि ऐसा करता तो क्या उत्तर प्रदेश या बिहार के सभी लड़कों पर नजर रखते। ऐसी हरकत से उनकी (कश्मीर के छात्र) देशभक्ति खत्म कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसी हरकतों के बाद छात्रों को उनके अभिभावक घर (कश्मीर) बुला लिए हाेंगे। उन्हें शहर की सड़कों पर घूमने में भी खतरा है। राजस्थान में ऐसा हो चुका है। मन्नान वानी से संबंधित सवाल पर उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान के किस विश्वविद्यालय से माओवादी नहीं निकले हैं। क्या सभी राज्यों के लड़कों पर निगरानी रखेंगे।
मन्नान का मामला सामने आने के बाद एएमयू में शैक्षणिक वातावरण पर प्रभाव के संबंध में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि पूरे देश का यही हाल है। केंद्रीय विश्वविद्यालयों में आरएसएस का पाठ पढ़ाया जा रहा है। हिंदुस्तान का हिंदूकरण हो रहा है, जबकि हिंदुस्तान धर्म निरपेक्ष राष्ट्र है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम लिए बिना कहा कि कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने नीच कहा तो उसमें अकबर कहां से आ गए। मनुस्मृति कहते तो बात समझ में आती। अकबर पहला आदमी था जिसने दलितों को अफसर बनाया। उन्होंने भाजपा नेताओं द्वारा कर्नाटक के मुख्यमंत्री के हिंदुत्व पर सवाल उठाए जाने पर भी क्षोभ व्यक्त किया।