योगी सरकार के खिलाफ बयानबाजी को लेकर चर्चाओं में रहने वाले प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर गुरुवार को बदायूं आने पर खुद सवालों में घिर गए। यहां पर पत्रकारों से बातचीत के दौरान अपने निजी सचिव पर लगे रिश्वत लेने के आरोप से जुड़े सवाल पर राजभर खुद को बचाते नजर आए। उन्होंने कहा कि यह मामला जैसे ही मेरे संज्ञान में आया, वैसे ही मैने अपने निजी सचिव को हटा दिया।
उन्होंने खुद मुख्यमंत्री और प्रमुख सचिव को चिट्ठी लिखकर कार्रवाई की सिफारिश की है। राजभर बोले- मेरा एक रिश्तेदार बीएसए का चार्ज लेने को लाइन में है। उसके लिए मैं खुद मुख्यमंत्री, प्रदेश संगठन मंत्री सुनील बंसल और अमित शाह से कई बार कह चुका हूं। फिर भी उसे बीएसए का चार्ज नहीं मिला। राजभर ने कहा कि मुझे नहीं पता था कि मेरे निजी सचिव के पास इतनी पावर है। वरना उसी से कहकर रिश्तेदार को बीएसए बनवा देता।
नोएडा के एक पार्क में सामूहिक नमाज पढ़ने पर रोक लगाने के सवाल पर कहा कि राजभर ने कहा कि संविधान सबको अपने हिसाब से पूजा-पाठ या नमाज पढ़ने की इजाजत देता है। उन्होंने नोएडा मामले पर विरोध जताया। कहा कि हमको आपको लड़ने, मरने के लिए भड़काया जाता है। यह सिर्फ वोट की राजनीति हो रही है। न मंदिर बनेगा, न मस्जिद बनेगी, न हिंदू राष्ट्र बनेगा और न ही धारा 370 हटेगी।
हनुमान जी पर हो रही बयानबाजी पर राजभर ने कहा कि पहले तो इंसान को जातियों मे बांटकर राजनीति की गई। अब भगवान को बांटने की कवायद शुरू हो गई है। 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा से गठबंधन के सवाल पर राजभर ने कहा कि 80 सीटों पर प्रत्याशी उतारे जाएंगे।