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#KabTakNirbhaya : दुष्कर्मियों को मिले मौत की सजा, बेटियों को बनाएं मजबूत

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सराय मियां से कैंडल मार्च निकालकर विरोध प्रदर्शन करते यूथ कांग्रेस के पदाधिकारी। - फोटो : CITY OFFICE
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हैदराबाद में महिला पशु चिकित्सक के साथ दुष्कर्म व हत्या के विरोध में युवतियों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। उनका कहना है कि दुष्कर्मियों को मौत की सजा देने के साथ ही बेटियों को मजबूत बनाया जाना चाहिए। यह भी कहा गया कि बेटे और बेटी में फर्क करना बंद किया जाय। इन युवतियों का दर्द अमर उजाला अपराजिता के तहत फोकस ग्रुप में खूब छलका।
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कल्पना जादौन ने कहा कि आखिर कब तक ऐसा होता रहेगा। बचपन से ही लड़की को कमजोर माना जाता है। वह अकेले जाएंगी तो सुरक्षित नहीं हैं। मगर वह कमजोर नहीं हैं। अगर इन घटनाओं पर रोक नहीं लगी तो दुनिया में आने से पहले बेटियों को गर्भ में ही मार दिया जाए। गंदे हाथ तो बेटियों को नहीं छू सकेंगे।
शालिनी ने कहा कि परिवार में बेटा-बेटी में फर्क समझा जाता है। यह सोच खत्म होनी चाहिए। युगांशी ने कहा कि बचपन से ही अभिभावक बेटा-बेटी में अंतर समझते हैं। बालिका को मजबूत बनाने की जरूरत है। अंबिका पाल ने कहा कि सरकार को कठोर कानून बनाना चाहिए। खाड़ी देशों में दुष्कर्म करने वाले व्यक्ति को मौत के घाट उतार दिया जाता है। पुलिस को हेल्मेट न लगाने पर चालान के रूप में रुपये मिलते हैं, लेकिन दोषियों को सजा दिलाने में रुपये नहीं मिलेंगे, तभी तो हमारे देश में दोषियों को जेल में रखा जाता है।
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अंकिता दीक्षित ने कहा कि दुष्कर्मी को फौरन सजा मिलनी चाहिए। सऊदीअरब से सबक लिया जा सकता है। दुष्कर्म के मामले में कठोर सजा का प्रावधान हो। कंचन राघव ने कहा कि महिलाओं को एक होना होगा। सोशल मीडिया पर अफसोस जताने से कुछ नहीं होने वाला है। हैवानों को सबक सिखाने का वक्त आ गया है।
शुभी शर्मा ने कहा कि बालिका हो या युवती, इन दरिंदों से नहीं बच पा रही हैं। सरकार की उदासीनता का फायदा दुष्कर्मी उठा रहे हैं। अंबिका चौहान ने कहा कि सरकार ऐसा कानून बनाए, जो लोगों में खौफ पैदा करे। स्कूल में नैतिक शिक्षा की पढ़ाई होनी चाहिए। सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग दी जाए। दुष्कर्मी को कड़ी सजा मिले। अगर वह मौत मांगे तो मौत न दी जाए बल्कि लगातार उसे तकलीफ देनी चाहिए।
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