एमएफ हुसैन की यादों की बेहतरीन निशानी को अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय ने भी अपने आगोश में सहेज रखा है। हुसैन ने अपने जीवन में एक विशालकाय भिति चित्र यानी म्यूरल अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के म्यूजियोलॉजी डिपार्टमेंट की दीवार पर बनाया। इसके लिए हुसैन कई हफ्तों तक एएमयू में ठहरे और इस कलाकृति को तैयार किया।
17 सितंबर 1915 को जन्मे मकबूल फिदा हुसैन 1968 के आसपास अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय आए। उस समय कर्नल बशीर हुसैन जैदी कुलपति थे। एएमयू इतिहास के मामलों के जानकार डॉ. राहत अबरार कहते हैं मकबूल फिदा हुसैन ने कैनेडी हॉल परिसर में म्यूरल बनाया। इसके साथ ही एक पेंटिंग और भी बनाई। यह पेंटिंग वाइस चांसलर लॉज में रखी गई। सन 2007 में जब प्रोफेसर पीके अब्दुल अजीज कुलपति थे, उस समय वीसी लॉज में अग्निकांड हुआ। उस अग्निकांड के बाद मकबूल फिदा हुसैन की यह दुर्लभ पेंटिंग मलबे में नहीं मिली।
अंदाजा लगाया गया कि यह पेंटिंग या तो जल गई या फिर किसी ने लूट लिया। इस पेंटिंग के विषय में स्वयं एमएफ हुसैन ने 1998 में तत्कालीन कुलपति महमूदउर रहमान से दिल्ली में जिक्र किया था। उन्होंने कहा था कि मेरी एक शुरुआती दौर की पेंटिंग आपके यहां लगी हुई है। अगर आप मुनासिब समझें तो वह पेंटिंग मुझे दे दें। बाद में फिर बात आई गई हो गई। यह वही पेंटिंग थी जो सन् 2007 में अग्निकांड का शिकार हो गई। अब विश्वविद्यालय में एमएफ हुसैन की निशानी के रूप में विशालकाय म्यूरल मौजूद है, जिसको विश्वविद्यालय बहुत हिफाजत के साथ सहेज कर रख रहा है।