पिसावा थानाक्षेत्र के गांव मीरपुर में दहेज के लिए पांच वर्ष पूर्व हुई विवाहिता की हत्या के दोषी पति को उम्रकैद और 75 हजार जुर्माने की सजा सुनाई गई है। दूसरी ओर सास को साक्ष्यों के अभाव में बरी किया गया है। मिशन शक्ति अभियान के तहत यह फैसला एडीजे-6 महेशानंद झा की अदालत से सुनाया गया है। खास बात है कि मृतका के परिवार के चार गवाहों के मुकरने के बावजूद अदालत ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर सजा सुनाई है।
अभियोजन अधिवक्ता एडीजीसी स्वर्णलता वर्मा के अनुसार घटना दो मई 2018 की है। जिसका मुकदमा तीन मई को सुरेंद्र सिंह निवासी सारंगपुर खुर्जा नगर बुलंदशहर ने पिसावा में दर्ज कराया। मुकदमे के अनुसार उन्होंने अपनी बेटी रजनी उर्फ रानी की शादी घटना से तीन वर्ष पूर्व मीरपुर के रहने वाले गौरव संग की थी। शादी के बाद से ही उसे दहेज के लिए परेशान किया जाने लगा। बुलेट बाइक की मांग को लेकर उसे फंदे पर लटकार मार दिया। इस सूचना पर जब वे बेटी की ससुराल पहुंचे तो उसका शव बेड पर पड़ा मिला और कमरे में साड़ी का फंदा बना लटका हुआ था।
खबर पर पुलिस ने पोस्टमार्टम व मुकदमे की कार्रवाई की। मुकदमे में पति गौरव व सास पुष्पा के खिलाफ चार्जशीट दायर की गई। अभियोजन अधिवक्ता के अनुसार इस मुकदमे में पुलिस चार्जशीट के आधार पर रजनी की मां, पिता, भाई सहित परिवार के चार गवाह पेश किए। मगर ये सभी पक्षद्रोही हो गए। हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर एम सैय्यद खान की गवाही में साफ हुआ कि रजनी की मौत गला दबाने से हुई। शरीर पर चोटों के निशान भी पाए गए। वहीं तहसीलदार ने अपने बयान में कहा कि घटना के बाद सास शव के पास खड़ी मिली। इन तथ्यों व गवाही के आधार पर सास को बरी करते हुए पति को दोषी करार देकर हत्या में उम्रकैद व 75 हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया है।