शहर कोतवाली क्षेत्र में दादों की युवती की शादी के बाद मौत के मामले में दर्ज दहेज हत्या के मुकदमे में न्यायालय ने आरोपी पति को 10 साल की सजा सुनाई है। खास बात यह है कि मुकदमा घटना के चार माह बाद दर्ज हुआ था। मिशन शक्ति अभियान के तहत मजबूत अभियोजन पैरवी के क्रम में एडीजे-तीन की विद्वान न्यायाधीश मनीषा के न्यायालय से यह सजा सुनाई गई है।
अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता एडीजीसी जेपी राजपूत के अनुसार, दादों निवासी हीरालाल की बहन कविता की शादी 16 फरवरी 2008 को तुर्कमान गेट कोतवाली निवासी राजेंद्र पुत्र वीरपाल संग हुई थी। आरोप है कि शादी के बाद से ही कविता को दहेज के लिए परेशान किया जाने लगा। 31 अक्तूबर 2011 को कविता की मौत की खबर मिली, जब मायके से लोग ससुराल पहुंचे तो लाश पड़ी थी और परिवार ने इसे आत्महत्या करार दिया।
पुलिस शिकायत पर पोस्टमार्टम हुआ। मगर पुलिस ने उस समय यह कहकर मुकदमा दर्ज नहीं किया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने पर दर्ज करेंगे। 21 फरवरी 2012 को पति के अलावा अन्य ससुरालियों को नामजद किया गया। मगर पुलिस ने विवेचना के बाद सिर्फ पति के खिलाफ हत्या, दहेज हत्या आदि आरोपों में चार्जशीट दायर की। जिसमें न्यायालय में अभियोजन पैरवी, साक्ष्य व गवाही के आधार पर आरोपी को दहेज हत्या का आरोपी करार दिया गया। न्यायालय ने शुक्रवार को आरोपी को दस साल कैद व 4 हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया है। एडीजीसी के अनुसार मिशन शक्ति के तहत उनके यहां पूर्व में एक मुकदमे में उम्रकैद की सजा कराई गई है।