चंदपा क्षेत्र के गांव कछपुरा में फैला बुखार अब महामारी का रूप ले चुका है। इसकी चपेट में आकर रविवार को जहां एक महिला की मौत हुई थी, वहीं अब उसके पति के भी सोमवार की रात्रि में आगरा के निजी चिकित्सालय में दम तोड़ दिया।
24 घंटे में एक बुखार से हुई दूसरी मौत के बाद पूरे जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग में खलबली मच गई। डीएम, एसडीएम और सीएमओ गांव पहुंचे और गांव की स्थिति देखी।
ग्रामीणों की यही शिकायत थी कि समय रहते मरीजों को उपचार नहीं मिला और न ही जलभराव की समस्या का निदान हुआ। इसके चलते आज गांव में बुखार का प्रकोप फैल गया है। पूरे गांव में घर-घर में चारपाई बिछी हुई हैं।
डीएम ने तीन एंबुलेंस और पांच चिकित्सकों की टीम की गांव में तैनाती करा दी है। शाम तक स्वास्थ्य विभाग की टीम ने घर-घर में सर्वे किया और संदिग्ध रोगियों की स्लाइड बनाकर उनका परीक्षण किया। अभी तक डेंगू के 10 संदिग्ध रोगी सामने आए हैं।
उल्लेखनीय है कि चंदपा क्षेत्र के गांव कछपुरा में पिछले कई दिन से बुखार का प्रकोप जारी है। पूरे गांव में घर-घर चारपाई बिछी हैं। इस बारे में स्वास्थ्य विभाग ने समय रहते ध्यान नहीं दिया। ऐसे में गांव के काफी मरीज अपना उपचार कराने के लिए गांव से बाहर सादाबाद व आगरा चले गए। गांव के अजीत, उनकी पत्नी नीलम और कुछ अन्य परिजनों को भी बुखार ने अपनी चपेट में ले लिया था। ऐसे में दोनों ने अपना उपचार कराया।
नीलम की रविवार को मौत हो गई थी। अजीत (45 वर्ष) का उपचार आगरा के एक निजी अस्पताल में चल रहा था। वहां सोमवार की रात्रि में उसने भी दम तोड़ दिया। पत्नी के बाद पति की मौत की खबर आते ही पूरे गांव में कोहराम मच गया। इधर, जैसे ही स्थानीय प्रशासन को यह सूचना मिली 24 घंटे के अंदर गांव में बुखार से दूसरी मौत हो गई है तो प्रशासन में खलबली मच गई।
डीएम प्रवीण कुमार लक्षकार, एसडीएम सदर नीतीश कुमार वहां पहुंच गए। सीएमओ डॉ. बृजेश राठौर भी अपनी टीम के साथ वहां पहुंच गए। इससे पहले वहां एक चिकित्सकीय दल मौजूद था और मरीजों का चिकित्सकीय परीक्षण कर रहा था। डीएम ने सीएमओ से पूरी जानकारी ली और घर-घर सर्वे कराकर रोगियों की स्लाइड आदि बनाकर उनका उपचार करने के निर्देश दिए।
इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने घर-घर जाकर सर्वे शुरू कर दिया। इस दौरान गांव में शाम तक डेंगू के 10 संदिग्ध रोगी मिले। इसमे सोमवार को मिले सात रोगी भी शामिल हैं। कुछ मरीजों को गांव से रेफर कर दिया गया, जबकि कुछ का प्राथमिक उपचार गांव में ही जारी था।