डिस्ट्रिक बोर्ड अथवा जिला परिषद का पहली बार गठन 1884 ईस्वी में किया गया था। बोर्ड सदस्यों के चुनाव के लिए मतदान की व्यवस्था की गई थी। बाद में 1906 में एक अधिनियम लाकर इसके स्वरूप में परिवर्तन किया गया। शुरुआती दौर में जिला परिषद में सदस्यों की संख्या 25 थी। इसमें मजिस्ट्रेट अध्यक्षता करता था। छह उपसंभागीय अधिकारी, तीन तहसीलों से तीन-तीन साल के लिए चुने सदस्य शामिल थे। बोर्ड के मुख्य कार्यों में सड़कों,घाटों, स्कूलों, दवाखानों, मवेशी तालाबों, टीकाकरण आदि की व्यवस्था और संचालन था।
एक पैकेट भेजने के लिए लगता था दो पैसे, 1872 में 15 इंपीरियल और 14 जिला पोस्ट आफिस थे जिले में
शुरुआती दौर में अलीगढ़ में डाक सेवाएं कुछ ही शहरों के लिए सीमित थीं। जिले के भीतर तहसीलों और टाऊन एरिया क्षेत्रों में कोई आंतरिक डाक सेवा नहीं थी। अलीगढ़ से जिन जिलों तक डाक सेवाएं थीं उनमें अलीगढ़-दिल्ली, अलीगढ़-मेरठ, अलीगढ़-मुरादाबाद, अलीगढ़-बरेली, अलीगढ़-आगरा और अलीगढ़-इलाहाबाद शामिल थे। जिले में आंतरिक डाक व्यवस्था पुलिस के जिम्मे थी। किसी प्रकार का संदेश आने-ले जाने में पुलिस कर्मियों का उपयोग किया जाता था। स्वाभाविक है कि इस तरह के संदेशों में ज्यादातर प्रशासनिक ही होते थे।
आम लोग निजी तौर पर ही संदेशों का आदान-प्रदान किया करते थे। अलीगढ़ में 1846 में आम जनता के लिए पहला पोस्ट आफिस खोला गया। एक पैकेट सामान भेजने के लिए दो पैसे लिए जाते थे। 1866 में इंपीरियल पोस्ट ऑफिस का तेजी से विस्तार किया गया। इस वक्त तक दो प्रकार के पोस्ट आफिस स्थापित किए गए। विदेश , अन्य जिलों से आई डाकों के आदान-प्रदान के लिए इंपीरियल और आंतरिक डाक के लिए जिला पोस्ट आफिस खोले गए। 1872 तक जिले में 15 इंपीरियल और 14 जिला पोस्ट आफिस स्थापित किए गए थे।
जारी...
स्रोत- अलीगढ़ का गजेटियर (1878-1909)