भूपेंद्र ईंट भट्ठे पर मजदूरी करता था। करीब आठ साल पहले उसके पिता की हादसे में मौत हो गई थी। वही परिवार के भरण-पोषण का सहारा था। मजदूरी कर घर लौटने के बाद वह पंखा चलाने लगा। इसी दौरान करंट की चपेट में आने से उसकी मौत हो गई।
16 सितंबर को गांव परौरा के मजरा नगला सावंती में पंद्रह वर्षीय किशोर की करंट की चपेट में आने से मौत हो गई। वह अपने घर का इकलौता चिराग था। उसकी मौत से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था।
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परौरा निवासी आशाराम का 15 वर्षीय पुत्र भूपेंद्र अपनी पढ़ाई छोड़कर ईंट भट्ठे पर मजदूरी करता था। करीब आठ साल पहले उसके पिता की हादसे में मौत हो गई थी। वही परिवार के भरण-पोषण का सहारा था। 16 सितंबर की शाम मजदूरी कर घर लौटने के बाद वह पंखा चलाने लगा। इसी दौरान करंट की चपेट में आने से उसकी मौत हो गई। वह दो बहनों के बीच में इकलौता भाई था।