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Aligarh: मई में मिली फर्जी डिग्री, नवंबर में मांगे रिकोर्ड, अस्पताल पंजीकरण में डॉक्टरों के नाम संग बदला जेंडर

Thu, 13 Nov 2025 05:09 PM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़

सार

स्वास्थ्य विभाग में डॉक्टरों के नाम से फर्जीवाड़ा कर अस्पताल पंजीकरण में नित-नए खेल सामने आ रहे हैं। अब उजागर हुआ है कि 2024-25 में ऐसे भी कारनामे हुए हैं, जिसमें फर्जीवाड़ा करते हुए डॉक्टरों के नाम सहित लिंग तक बदल दिए गए।
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प्रतीकात्मक तस्वीर अस्पताल - फोटो : adobe stock
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विस्तार
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अलीगढ़ में अस्पताल पंजीकरण के फर्जीवाड़े की नींव स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से पड़ी है या जानबूझकर आंख बंद करने से। इसका एक नमूना यह भी मिला है कि जिस फर्जी डिग्री वाले डॉक्टर दंपती को मई में ही झोलाछाप घोषित कर दिया था। अब सीएमओ स्तर से नवंबर में उन्हें नोटिस भेजकर शैक्षिक प्रमाण-पत्र मांगे हैं। ऐसे में सवाल यही उठता है कि फर्जीवाड़ा उजागर होने के छह माह बाद नोटिस का क्या औचित्य है। क्या शिकायत का शोर मचने पर महकमा खानापूर्ति कर रहा है।

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मामला खेरेश्वर बाईपास के गोल्डन हॉस्पिटल और गभाना के जीटी रोड स्थित ज्ञान हॉस्पिटल से जुड़ा है। जहां डॉ. सुकुमार यादव और उनकी पत्नी डॉ. अनीता सिंह यादव पंजीकृत चिकित्सक के रूप में काम कर रहे थे। इनका यूपी मेडिकल काउंसिल का रजिस्ट्रेशन फर्जी पाया गया था। इसकी जानकारी एसीएम द्वितीय और एसएसपी बदायूं ने सीएमओ को पत्र भेज कर दी थी। जिसके आधार पर तत्कालीन एसीएमओ डॉ. दिनेश खत्री ने मई माह में दोनों को फर्जीवाड़ा करने का पत्र जारी किया था। मगर अस्पताल बरकरार चलते रहे।

आईजीआरएस पोर्टल पर डॉ. सुकुमार यादव और डॉ. अनीता सिंह यादव की शिकायत आई थी। दोनों अस्पतालों में टीम भेज कर जांच कराकर नोटिस जारी किया गया है। पहले यह नहीं पता था कि यह वहीं हैं जिन्हें फर्जी घोषित किया गया है।-डॉ. नीरज त्यागी, सीएमओ

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शिकायत के बाद अब जागा महकमा

इधर, अब नवंबर में बदायूं के मो. साजिद ने डॉ. दंपती के खिलाफ आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत की। जिसमें दंपती पर बिना योग्यता के मरीजों का इलाज करने का आरोप लगाया। इस पर सीएमओ डॉ. नीरज त्यागी ने झोलाछाप नोडल अधिकारी डॉ. अमित शर्मा और बाबू हरवीर सिंह को जांच सौंपी। टीम ने दोनों अस्पतालों का निरीक्षण किया और 6 नवंबर तक चिकित्सक दंपती को उनके शैक्षिक प्रमाण-पत्र, एमबीबीएस डिग्री और मेडिकल काउंसिल रजिस्ट्रेशन उपलब्ध कराने का नोटिस जारी किया। नोटिस में चेतावनी दी गई कि दस्तावेज न देने पर कड़ी कार्रवाई होगी। इसी आधार पर महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा को पत्र लिखा है, जिसमें आईजीआरएस (जन सुनवाई पोर्टल) पर दर्ज शिकायत को खारिज करने की मांग की। यही नहीं शिकायतकर्ता को कार्रवाई से संतुष्ट होना भी पत्र में बताया। अब सवाल उठता है कि अगर डॉक्टर दंपती मई में ही फर्जी घोषित हो चुके थे, तो अब नोटिस का क्या मतलब? यह तो सिर्फ समय बर्बाद करने का बहाना लगता है। यह मामला अलीगढ़ के स्वास्थ्य तंत्र की पोल खोलता है। जिले में दर्जनों फर्जी अस्पतालों का संचालन हो रहा है।

दपंती के एसएमसी में पंजीकृत रजिस्ट्रेशन नंबर गलत
डॉ. सुकुमार यादव-1952 रजिस्ट्रेशन नंबर एसएमसी से पंजीकृत है, जबकि नेशनल मेडिकल कमीशन में इस नंबर पर मासाल्लाह खान का नाम दर्ज है। वह फैजाबाद के रहने वाले हैं। वहीं डॉ. अनीता यादव-2265 रजिस्ट्रेशन नंबर एसएमसी से पंजीकृत है, जबकि नेशनल मेडिकल कमीशन में इस नंबर पर परमेश्वर दयाल कत्याल का नाम दर्ज है। वह केरल के रहने वाले हैं।
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अस्पताल पंजीकरण में डॉक्टरों के नाम संग बदला जेंडर

स्वास्थ्य विभाग में डॉक्टरों के नाम से फर्जीवाड़ा कर अस्पताल पंजीकरण में नित-नए खेल सामने आ रहे हैं। अब उजागर हुआ है कि 2024-25 में ऐसे भी कारनामे हुए हैं, जिसमें फर्जीवाड़ा करते हुए डॉक्टरों के नाम सहित लिंग तक बदल दिए गए। कई डॉक्टर तो ऐसे भी हैं, जिनके दस्तावेज भी पोर्टल से गायब हैं। ये कारगुजारियां सीधे सीधे स्वास्थ्य महकमे पर सवाल खड़े कर रही हैं।

स्वास्थ्य विभाग के पोर्टल पर अस्पतालों के पंजीकरण में दर्ज चिकित्सकों के रजिस्ट्रेशन नंबर की पड़ताल करते हुए डॉ. एससी शर्मा लगातार नए खुलासे करने में जुटे हैं। अब उन्होंने उजागर किया है कि सिटी क्लीनिक एंड अल्ट्रासाउंड सेंटर की डॉ. एकता सिंह का रजिस्ट्रेशन नंबर स्वास्थ्य पोर्टल पर 22714 है, जबकि एनएमसी में यही नंबर बीआरडी मेडिकल कालेज गोरखपुर से एमबीबीएस करने वाले डॉ. बलराम सिंह के नाम से दर्ज है। यह किस तरह संभव हुआ होगा? खुद ही अंदाजा लगाया जा सकता है। यह कृत्य विभागीय सत्यापन पर सवाल खड़े कर रहा है। इसी तरह डॉ. अर्शिया क्लीनिक के डॉ. मो. सईम का रजिस्ट्रेशन नंबर 25513 है।

एनएमसी पोर्टल में इस नंबर पर अर्चना माथुर का नाम दर्ज है। जिन्होंने 1981 में आगरा से एमबीबीएस की डिग्री ली थी। अर्चना माथुर एक रिटायर्ड महिला डॉक्टर हैं। इस तरह फर्जी रजिस्ट्रेशन से मरीजों को गुमराह किया जा रहा है। यहीं नहीं गोल्डेन हॉस्पिटल के डॉ. प्रदीप कुमार का रजिस्ट्रेशन नंबर 85768 है। एनएमसी पोर्टल पर इस नंबर पर वंदना मक्कर का नाम दर्ज है। वहीं अकरम नियाज ट्रस्ट केयर सेंटर के चिकित्सक का रजिस्ट्रेशन नंबर 104477 यूपी मेडिकल काउंसिल में दर्ज ही नहीं है। वहीं डॉ. विनय कुमार का रजिस्ट्रेशन 86744 है। मगर एनएमसी के उत्तर प्रदेश मेडिकल काउंसिल के पोर्टल पर रिकार्ड नहीं है।
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