ग्रेटर अलीगढ़ योजना के लेआउट पर 13 अगस्त को प्रस्तावित एडीए बोर्ड की बैठक में मुहर लग सकती है। लेआउट मंजूर होने के बाद यहां फ्लैट लेने वालों का होम लोन आसानी से मंजूर होगा और योजना को रफ्तार मिलेगी।
लेआउट मंजूर होने के बाद सभी बैंक होम लोन देने के लिए तैयार हो जाएंगे क्योंकि इससे प्रोजेक्ट के वैध होने का प्रमाण मिलता है। एडीए की बोर्ड बैठक पहले छह अगस्त को होना तय हुआ था, लेकिन तैयारी पूरी नहीं होने के कारण इसे स्थगित कर दिया गया था।
खैर रोड पर सात गांवों की 323 हेक्टेयर भूमि पर यह योजना विकसित की जा रही है। पहले चरण में 70 हेक्टेयर क्षेत्र विकसित किया जाएगा। यहां दो हजार से अधिक छोटे-बड़े आवासीय व व्यावसायिक प्लॉट मिलेंगे। चौड़ी सड़कें, ग्रीन बेल्ट, पार्क, खेल सुविधाएं, जलापूर्ति, ड्रेनेज व आधारभूत ढांचे को विकसित किया जाएगा।
700 करोड़ की इस परियोजना के लिए प्रदेश सरकार 350 करोड़ रुपये दे चुकी है, शेष धनराशि एडीए अपने संसाधनों से जुटाएगा। अब तक 250 हेक्टेयर भूमि एडीए के पास आ चुकी है। इसमें 230 हेक्टेयर किसानों से खरीदी गई है, जबकि 20 हेक्टेयर सरकारी भूमि है। किसानों को 500 करोड़ का मुआवजा दिया जा चुका है।
योजना के लिए रुस्तमपुर अखन, अहमदाबाद, जतनपुर चिकावटी, अटलपुर, मूसेपुर, जिरौली दोर व ल्हौसरा विसावन गांवों की भूमि अधिग्रहीत की गई है। एडीए सचिव राहुल कश्यप ने बताया कि बोर्ड बैठक में ग्रेटर अलीगढ़ योजना के लेआउट की मंजूरी सबसे अहम मुद्दा है। अन्य मामलों पर भी विचार विमर्श होगा।
मंजूर लेआउट के फायदे
-बैंक आसानी से लोन देते हैं
-जमीन के कागजात कानूनी रूप से सही माने जाते हैं
-धोखाधड़ी का खतरा कम होता है
बिना लेआउट
-बैंक लोन आवेदन खारिज कर देते हैं
-विशेष मामलों में जांच के बाद विचार हो सकता है
-लोन मिलने में अधिक समय लगता है
-ब्याज दर और शर्तें जटिल हो जाती हैं