15 अगस्त 1947 को देश को अंग्रेजी शासन से मुक्ति मिली थी। इस वर्ष हम देश की आजादी की 72वीं वर्षगांठ मनाने जा रहे हैं। करीब 300 वर्ष तक भारत पर राज करने वाले अंग्रेजों की दमनकारी नीतियों की चर्चा तो होती ही रहती है, लेकिन उनके द्वारा भारत में कराये गए विकास कार्यों की चर्चाएं भी कम नहीं हैं। अलीगढ़ में ही स्थापित कलेक्ट्रेट का पुराना भवन उनकी अनूठी कार्यशैली और दूरगामी सोच का प्रत्यक्ष उदाहरण है। वर्ष 1960 में अंग्रेज लेफ्टिनेंट इंजीनियर जेएल वाट्स एवं एक्जीक्यूटिव इंजीनियर आर इलियट की देखरेख में बना यह भवन भले ही चंद वर्षों पूर्व कंडम घोषित कर दिया गया हो, लेकिन अपनी शानदार बनावट एवं कारीगरी का यह बेहतरीन नमूना है। जो आज भी पूरे शान से मौजूद है।
अभी भी चल रहे कई कार्यालय यहां तक कि न्यायालय
अलीगढ़। कंडम घोषित किये जाने के बाद पास में ही नया भवन बन गया है और डीएम न्यायालय से लेकर अन्य न्यायालय एवं कार्यालय नए भवन में स्थापित हो गए हैं, लेकिन अभी भी कई विभाग एवं कार्यालय इसी भवन में चल रहे हैं। यहां तक कि कामर्शिलय कोर्ट भी करीब छह सात माह पूर्व पुराने भवन में ही स्थापित किया गया है। इसके अलावा पूर्ति कार्यालय, डीएसओ कार्यालय, पंचस्थानिक विभाग आदि इसी पुराने भवन में ही चल रहे हैं।
तीन अप्रैल 1937 को हुई थी अलीगढ़ के पहले कलक्टर की तैनाती
अलीगढ़ कलेक्ट्रेट में कलक्टर भवन भले ही 1960 में बनकर तैयार हो गया हो और यहां मैरिस समेत कई अन्य कलक्टर तैनात रहे हों, लेकिन सरकारी रिकार्ड में इनका जिक्र नहीं मिलता है। उपलब्ध रिकार्ड के अनुसार तीन अप्रैल 1937 को पहले कलक्टर के रूप में एक भारतीय एटी नकवी ने अलीगढ़ के पहले कलक्टर के रूप में पदभार संभाला। वह यहां सात माह रहे। उनके बाद एमएचबी निधोरसोल ने 12 नवंबर 1937 को पदभार संभाला। उनका कार्यकाल चार माह का रहा। 15 मार्च 1938 को एटी नकवी दोबारा कलक्टर बनकर अलीगढ़ आए।
एडी डिक्सन थे पहले अंग्रेज कलक्टर
वर्ष 1937 से 23 अक्तूबर 1943 तक आठ कलक्टर बदले। इनमें एटी नकवी ने थोड़े थोड़े अंतराल में चार बार कलक्टर पद का भार संभाला। जबकि जेडी शुक्ला ने दो बार एवं एमएचबी निधोरसोल और जेडी शुक्ला एक-एक बार कलक्टर रहे। 23 अक्तूबर 1943 को पहले अंग्रेज कलक्टर के रूप में एडी डिक्सन ने पदभार संभाला। वह यहां एक साल रहे। उनके बाद अब्दुल जलील खां एक माह कलक्टर रहे और उसके बाद डिक्सन को 11 जुलाई 1945 को दोबारा कलक्टर बनाया गया। उनका कार्यकाल तीन माह का रहा। इसके बाद तीन दिन के लिए एसए हुसैन इस पद पर आए और 30 अक्तूबर 1945 को डिक्सन फिर यहां आ गए। 7 नवंबर 1946 को दूसरे अंग्रेज कलक्टर डी वाली यहां आए और 18 अगस्त 1947 तक कलक्टर पद पर रहे।
गोविंद नारायण रहे आजादी के बाद पहले कलक्टर
15 अगस्त 1947 को देश की आजादी के तीन दिन बाद 18 अगस्त 1947 को अंग्रेज कलक्टर डी वाली ने अपना पदभार विधिवत रूप से छोड़ा। लेकिन उससे पूर्व ही आजाद भारत के कलक्टर के रूप में गोविंद नारायण 14 अगस्त 1947 को अलीगढ़ आ चुके थे।
चंद्रभूषण सिंह अलीगढ़ के 73वें कलक्टर
तीन अप्रैल 1937 से अब तक अलीगढ़ को 73 कलक्टर मिल चुके हैं। वर्तमान डीएम चंद्रभूषण सिंह अलीगढ़ के 73वें कलक्टर हैं। इससे पहले कई कलक्टरों का कार्यकाल एक से ज्यादा बार है। लेकिन संख्या की दृष्टि से वर्तमान डीएम का नंबर 73वां है।