कल्याण सिंह कट्टर हिंदू छवि के नेता से पहले यूपी में पिछड़ों के बड़े नेता के रूप में उभरे थे। उसी दम पर उन्होंने भाजपा को सत्ता में पहुंचाने का काम किया था। उनके देहांत के बाद प्रदेश भाजपा में उस कद के पिछड़े नेता का अभाव दिखता है। वहीं विपक्षी दलों ने पीडीए के नाम पर पिछड़ों को एकजुट करने का दाव खेल रखा है। इसका नतीजा भाजपा को यूपी में हाल में हुए लोकसभा चुनाव में भी देखने को मिला था। इसी काट के रूप में भाजपा इस आयोजन में पूरी ताकत लगाने के साथ हिंदुत्व व पिछड़े एजेंडे को धार देने का प्रयास करेगी। ताकि आने वाले पंचायत व विधानसभा चुनाव तक की योजना बनाई जा सके। इसी तरह का प्रयास कल ही अलीगढ़ आए योगी आदित्यनाथ ने किया था।
तब भी हुए थे कल्याण को श्रद्धांजलि के ये आह्वान
बात अगर वर्ष 2023 के नुमाइश परिसर में हुए आयोजन की करें तो तब भी गृह मंत्री अमित शाह, सीएम योगी आदित्यनाथ व डिप्टी सीएम केशव प्रसाद सहित एक दर्जन मंत्री शामिल हुए थे। तब भी इन दिग्गजों ने यही आह्वान किया था कि यूपी की सभी सीटें जिताना ही कल्याण सिंह सरीखे नेता को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। साथ में कल्याण सिंह के बताए मार्ग पर यूपी की सत्ता चलाने की बात कहते हुए कल्याण सिंह द्वारा पिछड़ों के लिए किए गए कार्य याद दिलाकर यूपी के 40 फीसदी पिछड़ों को एकजुट करने का प्रयास किया था।
फिर परिवार जुटाएगा इतने दिग्गजों को
अपने जिले में सबसे अधिक सियासी दिग्गजों को एक साथ एक आयोजन में जुटाने का श्रेय हमेशा उनकी विरासत संभाल रहे कल्याण सिंह के परिवार को गया है। लोधी समाज में सर्वमान्य नेता रहे कल्याण सिंह के बाद उस स्थान को भरने के लिए खुद उनके पुत्र राजवीर सिंह राजू लगातार प्रयासरत हैं। इस बार फिर वे इतने सियासी दिग्गजों को एक मंच पर लाकर अपनी ताकत दिखाने जा रहे हैं, जिसके लिए वे खुद व उनकी पूरी टीम लगातार प्रयासरत है।