कांवड़ियों पर कहीं गुलाब बरसते होंगे लेकिन जिले में गंगा तट से पथ तक शिवभक्तों के पग-पग गंदगी बिखरी है। सांकरा के जिस गंगा घाट पर कांवड़ भरने श्रद्धालु आएंगे वहां चिताओं की राख, अर्थियों का सामान, बांस, कपड़े, पन्नियां और खंडित मूर्तियां पड़ी हैं। करीब 700 मीटर के पूरे स्नान घाट पर गंगाजल से पहले कीचड़ है।
सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार महाशिवरात्रि पर करीब डेढ़ लाख श्रद्धालु सांकरा घाट में गंगा स्नान करने और कांवड़ भरने आते हैं। गंगा नदी में बने पुल से करीब 700 मीटर दूर तक कच्चा स्नान घाट है, जहां श्रद्धालु अपने कपड़े आदि रखकर मां गंगा की गोद में डुबकी लगाते हैं। महाशिवरात्रि से एक दिन पहले सुबह से यहां कांवड़ियों का आना शुरू हो जाता है और देर रात करीब ढाई-तीन बजे तक आना-जाना बना रहता है।
प्रशासन की ओर से सांकरा घाट पर सफाई कराई जाती है। प्रकाश के साथ ही खोया-पाया केंद्र बनाया जाता है। वस्त्र बदलने के लिए टेंट लगाकर अस्थाई कमरे बनाए जाते हैं। कुछ समय पहले तक इस घाट की जिम्मेदारी अलीगढ़ जनपद प्रशासन के पास थी। यह क्षेत्र संभल जिले की सीमा में आने के कारण अब संभल जिला प्रशासन पर है। दो दिन बाद ही महाशिवरात्रि है, लेकिन घाट पर सफाई के लिए एक झाड़ू तक नहीं चली।
सड़कों पर नालियों का पानी और कंकड़
भोले की भक्ति में कांवड़ियों के धैर्य की परीक्षा है। जगह-जगह सड़कों पर गड्ढे और कंकड़ हैं। नालियों का पानी भरा है, जिनसे होकर कांवड़िया गंगाजल लेकर शिवालयों की ओर जाएंगे। गांव आलमपुर चौराहा में सड़क के दोनों ओर नालियां नहीं हैं, जिससे घरों का खारिज पानी सड़क किनारे और गड्ढों में भरा है। गांव गिरधर में सड़क टूटी है और गंदा पानी भरा है। गांव लहरा में टूटी सड़क की गिट्टियां बाहर निकली हैं। निचली गंग नहर में नया पुल बना है, लेकिन वहां भी सड़क पर बड़े-बड़े कंकड़ हैं, जो कांवड़ियों के पैरों में चुभेंगे।
. खंड विकास अधिकारी जुनावई को निर्देश दिया है कि जल्द ही घाट पर सफाई कराई जाए। घाट पर प्रकाश की व्यवस्था के साथ खोया-पाया केंद्र और बैरिकेडिंग की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। -अवधेश कुमार, एसडीएम गुन्नौर।