हाथरस जिले में इगलास रोड स्थित बीछिया गांव में जेल बनने का रास्ता साफ हो गया है।70 किसानों ने जमीन देने का एलान किया है। हालांकि, जेल निर्माण के लिए दो बार जमीन देखी जा चुकी है, लेकिन कहीं जगह छोटी पड़ गई तो कहीं अदालती पेच फंस गया। मगर इस बार सब कुछ तय मसौदे के तहत हो रहा है और 54 करोड़ कीमत की इस 60 एकड़ जमीन पर जेल बनने के संकेत मिल रहे हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि 11 अगस्त को पेश होने वाले बजट में जेल के लिए बजट मंजूर हो जाए।
हाथरस पहले अलीगढ़ जिले का हिस्सा था, जो तीन मई 1997 को नए जनपद सृजन के साथ ही उससे हाथरस अलग हो गया। इस नए जिले में कोई जेल नहीं थी, इसलिए यहां के कैदी अलीगढ़ में बनी ब्रिटिश जमाने की जेल में आते हैं। इस जेल में 1100 महिला-पुरुष बंदियों के रहने की क्षमता है, लेकिन मौजूदा समय में तीन हजार से ज्यादा बंदी हैं, जो क्षमता से काफी ज्यादा है। जेल में बोझ कम करने की मकसद से कारागार प्रशासन ने हाथरस में सिकंदराराऊ मार्ग पर सोखना में पुलिस लाइंस के बराबर जेल निर्माण के लिए जमीन देखी, लेकिन यहां के किसान इसके विरोध में अदालत चले गए।
र्हाईकोर्ट से सुप्रीमकोर्ट तक मुकदमेबाजी हुई। निर्माण का मामला ठंडे बस्ते में चला गया। फिर, सलेमपुर में यूपीएसआईडीसी की जमीन देखी गई, मगर जेल के लिहाज से जगह कम पड़ गई। हालांकि, जेल निर्माण के लिए जमीन की तलाश चल रही थी। पिछले दिनों इगलास रोड स्थित बीछिया गांव के 70 किसानों ने जेल निर्माण के लिए अपनी जमीन देने की घोषणा कर दी। जेल प्रशासन ने इसकी जानकारी जिला प्रशासन को दी। प्रशासन ने शासन को रिपोर्ट भेज दी है। वैसे, जमीन की कीमत 54 करोड़ रुपये आंकी गई है। 40 एकड़ में जेल व 20 एकड़ में अधिकारियों व कर्मचारियों के लिए आवास का निर्माण होगा। शासन ने इस प्रस्ताव पर सहमति जताते हुए कारागार प्रशासन से जमीन का मूल्यांकन और खसरा-खतौनी सहित सभी दस्तावेजी साक्ष्य मांगे हैं। ताकि जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी कराकर जल्द बजट जारी कर निर्माण शुरू कराया जा सके।
जेल निर्माण को लेकर जमीन का जो प्रस्ताव आया है, उस पर आगे की औपचारिकताओं के लिए गुरुवार को डीएम से मुलाकात की है, उनसे जेल निर्माण को लेकर चर्चा हुई है। दो-तीन दिन में पंचायत प्रतिनिधियों के साथ अन्य सभी विभागों के अधिकारियों संग डीएम बैठक करेंगे, उनसे इस मसले पर चर्चा होगी। इसके बाद किसानों के खसरा-खतौनी और उनकी सहमति रूपी पत्र को शासन को भेजी जाएगी।
-आलोक कुमार, वरिष्ठ कारागार अधीक्षक अलीगढ़