मां-बाप की की इकलौती बेटी को सांस लेने में तकलीफ, वजन कम होना, थकान और सीने में दर्द जैसी समस्याएं लगातार सताती थीं। परिवार ने कई अस्पतालों में दिखाया, लेकिन इलाज सफल नहीं हुआ। दिन-ब-दिन परेशानी बढ़ती जा रही थी।
अलीगढ़ में चिलकौरा लोधा की बालिका नंदिनी के लिए हर धड़कन एक जंग थी। जन्म से दिल में छेद, नीले पड़ते होंठ, स्कूल जाने से भी डर। गरीब माता-पिता इलाज को तरसते रहे। मगर सरकार की आरबीएसके योजना ने उसकी किस्मत पलट दी और मासूम को मौत के मुंह से खींचकर नई जिंदगी दे दी।
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कोल तहसील के लोधा ब्लॉक स्थित गांव चिलकौरा लोधा की दस वर्ष की नंदिनी जन्म से ही हृदय रोग से पीड़ित थी। पिता सन्जू और माता कमलेश देवी की इकलौती बेटी को सांस लेने में तकलीफ, वजन कम होना, थकान और सीने में दर्द जैसी समस्याएं लगातार सताती थीं। परिवार ने कई अस्पतालों में दिखाया, लेकिन इलाज सफल नहीं हुआ। दिन-ब-दिन परेशानी बढ़ती जा रही थी। गरीब परिवार के लिए महंगा इलाज एक बड़ी चुनौती बन चुका था।
एक दिन गांव के स्कूल में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) की टीम स्वास्थ्य जांच कर रही थी। स्टाफ नर्स ने नन्दिनी के लक्षणों को गंभीरता से लिया और चिकित्सक को बताया। आरबीएसके टीम ने तुरंत जांच की और निःशुल्क इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। जिसके बाद नन्दिनी की सफल सर्जरी हुई।
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जिंदगी से जंग जीत खुशहाल जीवन जी रही नंदनी
सर्जरी के बाद नंदिनी पूरी तरह स्वस्थ है। वह बिना थकान के खेलती-कूदती है और सामान्य जीवन जी रही है। परिवार खुशी से गदगद है। माता-पिता आरबीएसके टीम डॉ. सरफराज अंसारी, डॉ. सोनल जुनैजा, ऑप्टोमेट्रिस्ट अतुल कुमार और स्टाफ नर्स अल्का का आभार व्यक्त करते हैं।