अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के कुलपति की चयन प्रक्रिया के मामले में 11 फरवरी को हाईकोर्ट में सुनवाई होगी। कुलपति प्रो. नईमा खातून के वकील श्यामल नारायण ने हाईकोर्ट में मामले में जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय मांगा है। अगर कोई जवाबी हलफनामा है तो उसे एक सप्ताह के भीतर दाखिल किया जा सकता है।
9 जनवरी को न्यायमूर्ति अश्विनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति डी. रमेश ने कुलपति चयन प्रक्रिया मामले की सुनवाई की। उनके न्यायालय में कुलपति प्रो. नईमा खातून के वकील श्यामल नारायण ने हलफनामा दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय देने का अनुरोध किया। न्यायमूर्ति की बेंच ने कहा, अगली तारीख पर कोई और अनुरोध स्वीकार नहीं किया जाएगा और मामले का अंतिम रूप से निर्णय किया जाएगा।
बता दें कि कुलपति की चयन प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी का आरोप लग रहा है। इससे पहले भी कई याचिकाएं दाखिल हुई हैं। इनमें जामिया मिल्लिया इस्लामिया दिल्ली के सैयद अफजल मुर्तजा रिजवी, एएमयू के प्रो. मुजाहिद बेग और सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ. एमयू रब्बानी ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। कुलपति पैनल में प्रो. एमयू रब्बानी, प्रो. फैजान मुस्तफा और प्रो. नईमा खातून का नाम शामिल था।
आरोप था कि चयन प्रक्रिया में प्रो. नईमा खातून के नाम को लेकर आपत्तियां दर्ज कराई जा रही थीं। उनकी नियुक्ति से पहले उनके पति प्रो. गुलरेज कार्यवाहक कुलपति थे। कुलपति ने पैनल उनके वोट को लेकर भी आपत्तियां थीं। लेकिन, इन सभी विवादों के बीच प्रो. नईमा खातून एएमयू की पहली महिला कुलपति बन गईं।