फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

प्रेशर हॉर्न के कारण गड़बड़ा रही गणित

विज्ञापन
-डॉ. विपिन वार्ष्णेय, प्रधानाचार्य, डीएवी इंटर कॉलेज। - फोटो : CITY OFFICE
विज्ञापन
शहर में शिक्षा के मंदिरों के बाहर बजने वाले हॉर्न के खिलाफ अमर उजाला द्वारा चलाए जा रहे अभियान के क्रम में शनिवार को छर्रा अड्डा पुल के दूसरी ओर सटे डीएवी इंटर कालेज की पड़ताल की गई। यहां पहुंचे तो पता चला कि विद्यालय के 100 मीटर के दायरे में साधारण ही नहीं, बल्कि हाई प्रेशर हॉर्न बजते हैं। इतना ही नहीं, फर्राटा भरने वाले तीन पहिया ऑटो रिक्शा के गाने विद्यालय परिसर में गूंजते हैं। नतीजा यहां पर पढ़ाई प्रभावित हो रही है। बच्चे गणित के फार्मूले समझ नहीं पाते हैं। इसके लिए गणित के सहायक अध्यापक प्रेम कृष्ण भारद्बाज अलग से कक्षाएं लगाते हैं। उन्होंने बताया कि 20 सालों से सेवा दे रहा हूं। हॉर्न के शोर ने इतना परेशान कर रखा है कि अब तो सुनाई भी कम देने लगा है।
विज्ञापन

डीएवी इंटर कालेज के मुख्य द्वार के ठीक सामने छर्रा अड्डा पुल नौरंगाबाद की तरफ से शुरू हो रहा है। विद्यालय के 100 मीटर के दायरे में साइलेंस जोन होना चाहिए। लेकिन यहां साइलेंस जोन सिर्फ नाममात्र के लिए है। दोपहिया हो या तीन पहिया। चार पहिया हो या अन्य बड़े वाहन। सभी के हॉर्न दिनभर कक्षाओं में विघ्न डालते हैं। कोरोना संक्रमण काल के बाद कक्षा नौ से लेकर 12 तक की कक्षाएं इन दिनों चल रही हैं। शिक्षकों ने कहा कि प्रशासन को विद्यालयों के बाहर साइलेंस जोन के नियमों का पालन कराना चाहिए।
- 20 सालों से विद्यालय में गणित पढ़ा रहा हूं। हाई प्रेशर हॉर्न से स्वभाव में न सिर्फ चिड़चिड़ापन आ गया है बल्कि सुनाई भी कम देने लगा है। यह सब ध्वनि प्रदूषण से ही हुआ है। कक्षा में जब पढ़ाता हूं तो अब तेज बोलने की आदत हो गई है। पढ़ाई के समय हॉर्न बजने पर बच्चों को सुनाई नहीं देता है। ऐसे में वह बार बार पूछते हैं। जाम के समय तो आधा-आधा घंटे का समय बर्बाद हो जाता है। ऐसे में प्रधानाचार्य से अनुमति लेकर अलग से भी कक्षाएं लगाकर बच्चों को गणित पढ़ाता हूं। प्रेम कृष्ण भारद्वाज, सहायक अध्यापक गणित, डीएवी इंटर कालेज।
विज्ञापन

- हॉर्न से तो पढ़ाई प्रभावित होती ही है। साथ ही टैंपों में बजने वाले तेज आवाज के गानों से परेशानी होती है। कई बार तो चलती कक्षा में यह गाने हास्य का कारण बन जाते हैं। सब पढ़ा पढ़ाया हाई प्रेशर और म्यूजिकल हॉर्न के चलते बेकार हो जाता है। विद्यालय के बाहर हार्न और गाने बंद होने चाहिए। आदित्य कुमार, छात्र कक्षा 12।
- यह बात सत्य है कि शिक्षण संस्थानों के 100 मीटर के दायरे में साइलेंस जोन होता है। लेकिन इसका पालन न के बराबर होता है। अमर उजाला ने जो अभियान चलाया है, वह सराहनीय है। अगर साइलेंस जोन का पालन हो जाए तो इससे कक्षाएं सुचारू रूप से चलेंगी और छात्र और छात्राओं को इसका लाभ मिलेगा। - डॉ. विपिन वार्ष्णेय, प्रधानाचार्य, डीएवी इंटर कॉलेज।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें