पिछले करीब 80 वर्षों में अलीगढ़ की स्वास्थ्य सेवाओं ने जो सफर तय किया है, वह किसी चमत्कार से कम नहीं है। वर्ष 2007-08 का वह समय था, जब शहर को अपनी पहली आईसीयू एंबुलेंस और प्राइवेट अस्पतालों में आईसीयू की सुविधा मिली। वर्ष 2009-11 में डायलिसिस और कैथलैब की शुरुआत ने अलीगढ़ को आत्मनिर्भर बनाना शुरू किया। आज शहर में गैस्ट्रो, न्यूरो सर्जन और कार्डियोलॉजिस्ट मौजूद हैं जिनके पास माइक्रोस्कोप से ब्रेन सर्जरी और जॉइंट रिप्लेसमेंट करने की आधुनिक मशीनें हैं। 60 किलोमीटर की परिधि में रहने वाले लाखों लोगों के लिए अलीगढ़ अब उम्मीद का सबसे बड़ा केंद्र है।
जेएन मेडिकल कॉलेज
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय का जेएन मेडिकल कॉलेज अपनी सीमाओं को लांघकर अब उत्तर भारत का एक प्रमुख सेंटर बन चुका है। कानपुर तक ऐसा कोई ट्रॉमा सेंटर नहीं है जो जेएन मेडिकल कॉलेज की आधुनिकता का मुकाबला कर सके। यहां के कार्डियोलॉजी विभाग में न केवल एंजियोग्राफी और पेसमेकर की सुविधा है, बल्कि जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित बच्चों की निशुल्क सर्जरी भी की जा रही है। न्यूरो सर्जरी और कार्डियोलॉजी में उच्च स्तरीय पाठ्यक्रमों (एमसीएच और डीएम) की शुरुआत ने यह सुनिश्चित किया है कि यहां से निकलने वाले डॉक्टर देश की सेवा के लिए पूरी तरह तैयार हों। एमआरआई, सिटी स्कैन और एंडोस्कोपी जैसी सुविधाएं अब आम आदमी की पहुंच में हैं।
इलाज तब तक प्रभावी नहीं होता जब तक मरीज समय पर अस्पताल न पहुंच जाए। जनपद में एंबुलेंस का एक मजबूत नेटवर्क तैयार है, जिसमें 112 और 102 सेवा की गाड़ियां ग्रामीण और शहरी इलाकों में मुस्तैदी से तैनात हैं। एडवांस लाइफ सपोर्ट (एएलएस)- तीन ऐसी एंबुलेंस हैं जो ''चलते-फिरते अस्पताल'' की तरह हैं। इनमें वेंटिलेटर और लाइफ सेविंग उपकरण लगे हैं। इन एंबुलेंसों का लक्ष्य मरीज को महज 15 मिनट में नजदीकी सरकारी अस्पताल पहुंचाना है, ताकि इलाज में एक पल की भी देरी न हो।
सरकारी और निजी क्षेत्र का संगम
कोविड संकट ने जहां पूरी दुनिया को झकझोरा, वहीं इसने अलीगढ़ के सरकारी अस्पतालों के प्रति जनता के विश्वास को मजबूत किया। जिला अस्पताल से लेकर मेडिकल कॉलेज तक, बुनियादी ढांचे में बड़ा सुधार हुआ है। वहीं, निजी अस्पतालों ने सुपर स्पेशियलिटी सेवाएं देकर दिल्ली और एनसीआर के बड़े अस्पतालों की निर्भरता को पूरी तरह खत्म कर दिया है। सबसे राहत की बात यह है कि यह तमाम उपचार बड़े शहरों की तुलना में बहुत कम दर पर उपलब्ध हैं।
चिकित्सा सेवा का नया सूरज
आज अलीगढ़ की 95 फीसदी बीमारियों का इलाज यहीं संभव है। यहां के चिकित्सा क्षेत्र ने न केवल लोगों को सेहत का उपहार दिया है, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा किए हैं। अब यहां का मरीज दिल्ली की सड़कों पर एंबुलेंस में संघर्ष नहीं करता, बल्कि अलीगढ़ के ही किसी अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में नया जीवन पाता है।