महज 13 साल की उम्र में गांजा, शराब, बीड़ी-सिगरेट से लेकर व्हाइटनर जैसे नशे की गिरफ्त में फंसी किशोरी पर किसी का कोई अंकुश नहीं है। बाप सुदूर कहीं रहता है। घर में अकेली निशक्त मां है। ऐसे में निरंकुश किशोरी का हाल यह है कि मांगने पर यदि उसे कोई बीड़ी नहीं देता तो वह पत्थर फेंककर मारने पर उतारू हो जाती। यही नहीं दस रुपये नहीं देने पर वह गाली-गलौज करने लगती है। नशे का लालच देकर जब उस से दुष्कर्म किया गया तो उसने इज्जत के बदले आरोपी के बेटे को ही मार डाला।
शुरुआती में जब पुलिस अधिकारी किशोरी से पूछताछ कर रहे थे तो वह एक ही बात कह रही थी कि उसने अकेले ही मारा है। बाद में जब उससे असलियत खोली तो सभी चौंक पड़े। उसने बताया कि सोमना रोड के एक नलकूप पर उसके साथ अमित के पिता रिंकू ने बुरा काम किया था। उसे बदले में गांजा पिलाने का लालच दिया था। विरोध करने पर भी रिंकू ने उसे नहीं छोड़ा था। तभी से वह गुस्से में थी। उसका कहना है कि वह लोगों के मनोरंजन का साधन बनती जा रही थी। मगर अब यह सहन नहीं हो रहा था।