चुनावी घोषणा पत्र के अनुसार मुसलमानों को आरक्षण नहीं दिए जाने से खफा एएमयू छात्र नेता जानिब हसन ने सपा के प्रदेश अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री अखिलेश यादव तथा सचिव एसआरएस यादव कोे वकील के माध्यम से कानूनी नोटिस भेजा है। उन्हें 15 दिनों में नोटिस का जवाब नहीं देने पर धारा 420, 467, 468, 471 के तहत न्यायालय में मुकदमा दर्ज कराने की चेतावनी भी दी गई है।
नोटिस में एएमयू के पूर्व कैबिनेट मेंबर जानिब हसन पुत्र जाहिद अली ने कहा है कि 2012 के चुनाव के दौरान रंगनाथ मिश्र एवं सच्चर कमेटी की सिफारिशों का हवाला देते हुए सपा नेताओं ने मुसलमानों की आर्थिक दशा सुधारने, सामाजिक एवं शैक्षणिक स्तर पर दलितों से बदतर मानते हुए उन्हें जनसंख्या के आधार पर आरक्षण देने, नए शैक्षणिक संस्थान खोलने की घोषणा की थी। इसके अलावा भी मुस्लिम हितों से जुड़ी 16 घोषणाएं घोषणा पत्र में शामिल की गईं थीं।
इसमें मुसलमानों को 18 प्रतिशत आरक्षण देने की बात भी कही गई थी।
सता में आने के बाद प्रदेश सरकार ने आज तक सच्चर कमेटी एवं रंगनाथ मिश्र की सिफारिशों को उत्तर प्रदेश में लागू नहीं किया न ही मुसलमानों को आरक्षण दिया गया। जानिब हसन का कहना है कि घोषणा पत्र से प्रभावित होकर मुसलमानों ने 2012 में मतदान किया और सपा सत्ता में आई। घोषणा पत्र से लगता है कि मुसलमानों का मत प्राप्त करने के उद्देश्य से छल, फरेब, धोखा धड़ी करते हुए झूठे घोषणा पत्र के आधार पर मत प्राप्त किए गए। छात्र नेता के वकील धनवीर सिंह ने कहा कि सोमवार को सपा अध्यक्ष एवं सचिव को नोटिस भेज दिया गया है।