हाथरस के कृतार्थ हत्याकांड में पुलिस ने सीसीटीवी से अहम सबूत मिलने का दावा किया है। पुलिस ने चार्जशीट में बताया है कि सीसीटीवी कैमरों का समय अपडेट नहीं था। आरोपी अंगोछा लिए दिखाई दिया है। पुलिस ने 436 पेजों का आरोप पत्र गत 23 दिसंबर को कोर्ट में दाखिल किया था।
हाथरस के कृतार्थ हत्याकांड में हुए नए खुलासे में पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज से अहम साक्ष्य मिलने का दावा किया है, लेकिन वह अपडेट नहीं था और पांच दिन पुरानी तारीख दिखा रहा था। जिस अंगोछे ये हत्या किए जाने की बात कही गई है, वह आरोपी के हाथ में दिखा है।
घटना के वक्त सीसीटीवी कैमरे के तार टूटे हुए थे, इसकी डीवीआर पुलिस ने विधि विज्ञान प्रयोगशाला में भेजी थी। वहां इसकी जांच की गई। इसमें पाया गया कि सीसीटीवी में 17 सितंबर की तारीख दिख रही है, जो घटना वाले दिन से पांच दिन पुरानी है।
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Hathras Murder Case
- फोटो : अमर उजाला
समय में बदलाव दिख रहा है। वास्तविक दिनांक 23 सितंबर है। रिपोर्ट में विशेषज्ञों ने बताया है कि ऐसा तकनीकी कमी के कारण हो सकता है। कैमरा नंबर तीन की फुटेज में 2.58 बजे जसोदन सिंह, प्रिसिंपल लक्ष्मण सिंह और शिक्षक राजेंद्र सिंह बच्चों के साथ भूतल की गैलरी में दिख रहे हैं। मृतक बच्चा कृतार्थ तख्त पर लेटा हुआ दिख रहा है। तीन बजे दो व्यक्ति बच्चे को ले जाते हुए दिख रहे हैं।
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कैमरे में अंगोछा फेंकते हुए दिखा आरोपी
आरोप पत्र में आरोपी बाल अपचारी के बयान में कृतार्थ के जमीन पर सोने की बात है। फिर उसे तख्त पर किसने लिटाया, यहां यह भी सवाल उठ रहा है। कैमरा नंबर चार में बच्चे को गेट की तरफ ले जाया जा रहा है। बाल अपचारी ने बताया कि ब्लैक टी शर्ट में वह स्वयं है, इसी कैमरे में वह अंगोछा फेंकते हुए दिख रहा है। फिर उसे उठाकर लाते हुए और हाथ में लपेटते हुए दिख रहा है।
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हत्याकांड का खुलासा
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नंबर बढ़ाने का खेल... जल्दबाजी में आरोपी भेज दिए थे जेल
हाथरस में कक्षा के मासूम छात्र की हत्या में पुलिस ने आनन-फानन आरोपी जेल भी भेज दिए। अब तीन माह बाद फिर से एक नया खुलासा हुआ और एक बाल अपचारी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। सवाल उठते रहे, पुलिस जवाब देने से बचती रही, फिर खुद की ही पहली जांच को गलत ठहरा दिया। क्या यह सब एक विवेचक ने कर दिया, सवाल तो अधिकारियों पर भी उठ रहे हैं।
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कक्षा आठ का छात्र निकला आरोपी
तंत्र-मंत्र को हत्या की वजह बताते हुए पुलिस ने खुलासा किया था। स्कूल के प्रबंधक, उसके पिता, प्रिसिंपल और दो अध्यापकों को जेल भी भेज दिया। वह तब से ही जेल में है। तीन माह बाद जब चार्जशीट दाखिल की तो आरोपी कक्षा आठ का छात्र निकला। इतना ही नहीं तीन माह पहले पुलिस ने जो कहानी बनाई थी, उसे भी पूरी तरह से झूठा ठहरा दिया। जिन साक्ष्यों के आधार कक्षा आठवीं के छात्र को आरोपी बनाया गया, वह तथ्य तो पहले भी सामने आए थे। डीवीआर भी तभी जांच के लिए भेज दी गई थी।
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स्कूल में हुई थी हत्या
इन तीन माह के दौरान जांच करने वाले विवेचक ही बदले हैं, जांच का पर्यवेक्षण करने वाले अधिकारी तो वही हैं। सवाल उठ रहा है कि क्या उस समय पुलिस ने सही से जांच नहीं की थी और आरोपियों को आधी अधूरी जांच के बाद जेल भेज दिया। आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने से पहले अधिकारियों ने स्वयं पूछताछ नहीं की थी। पुलिस की कहानी में कुछ न कुछ तो झोल था, जो परिजनों को विश्वास में नहीं लिया गया। स्कूल में हत्या हुई थी, मामला संगीन था, फिर भी पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजने में जल्दबाजी क्यों दिखाई, यह बड़ा सवाल है।
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आरोपी ने पुलिस को बताई ये कहानी
आरोपी ने पुलिस को बताया था कि 22 सितंबर की रात में सभी बच्चे हॉल में सो रहे थे। मेरा छोटा भाई और छात्र कृतार्थ फर्श पर गद्दा लगाकर सो रहे थे। मैं भी उसी हॉल में था। जब देखा कि सभी सो रहे हैं तो मैं अपने बिस्तर से उठा और कृतार्थ के पास जाकर लेट गया। मेरे पास लाल रंग का अंगोछा था। मैंने धीरे-धीरे अंगोछा कृतार्थ के गले में कस दिया। बाद में पूरी ताकत लगाकर खींच दिया।
कृतार्थ कुछ देर के लिए तड़पा और फिर शांत हो गया। सुबह करीब 5:00 बजे रोजाना की तरह प्रिंसिपल साहब लक्ष्मण सिंह बच्चों को जगाने आए तो कृतार्थ नहीं जागा था। इसी हॉस्टल वाले कमरे में मास्टर राम प्रकाश सोलंकी भी लेटे थे। प्रिंसिपल लक्ष्मण सिंह और सोलंकी सर ने कृतार्थ को देखा। कृतार्थ नहीं बोला तो प्रिंसिपल ने एमडी को फोन किया वह आए और इसके बाद ये कृतार्थ को ले गए।
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कृतार्थ के पिता बोले-पुलिस ने पैसे लेकर बदल दिया पूरा मामला
हाथरस के गांव तुरसैन निवासी कृतार्थ के पिता श्रीकृष्ण ने पुलिस के नए खुलासे पर सवाल खड़े किए हैं और गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस ने पैसे लेकर पूरा मामला बदल दिया है। पिता के अलावा बच्चे के ताऊ घनश्याम और बाबा मानसिंह ने भी आरोपपत्र में हेरफेर करने का आरोप थाने से लेकर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों पर लगाया है।
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इन्होंने कहा है कि हत्या के दो दिन बाद आरोपी छात्र को पुलिस ने पूछताछ के लिए बुलाया था, उसे काफी प्रताड़ित भी किया, इसके बाद उसे छोड़ दिया था। अब उसे फिर से आरोपी बना दिया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि स्कूल प्रबंधक ने जेल में ही एक अध्यापक को पचास लाख रुपये देने की पेशकश की थी और उसे इल्जाम को अपने ऊपर लेने के लिए कहा था। वह दोषी नहीं तो ऐसा क्यों कर रहा था।
इस केस की पुनः विवेचना की गई है। इस मामले में फिर से सभी के बयान दर्ज किए गए थे। बच्चों के भी बयान लिए गए थे। सीसीटीवी फुटेज परीक्षण भी किया गया था। इसके बाद नए तथ्य फिर सामने आए थे। न्यायालय ने भी बारीकी से हर चीज का अध्ययन किया है। जो पुलिस पर आरोप लगे हैं, वह निराधार हैं।
पीड़ित आगे न्यायालय की शरण भी ले सकता है। - हिमांशु माथुर, सीओ सादाबाद।