वहीं, पीड़ित पक्ष के वकील महीपाल सिंह निमहोत्रा ने कहा कि न्यायालय के इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट जाएंगे। सीबीआई ने सामूहिक दुष्कर्म और हत्या के मामलों में चार्जशीट दाखिल की था। बता दें कि उत्तर प्रदेश के हाथरस कांड ने न केवल प्रदेश बल्कि पूरे देश में लोगों को गुस्से से उबाल दिया था। इस मामले को लेकर यूपी से दिल्ली तक सियासी घमासान चला। आइए जानते हैं इस मामले में 14 सितंबर के बाद आखिर क्या-क्या हुआ...
हाथरस के चंदपा इलाके के एक गांव में 14 सितंबर 2020 को अनुसूचित जाति की एक युवती के साथ दरिंदगी हुई। गांव के ही चार युवकों ने दुष्कर्म किया और उसकी गला दबाकर हत्या करने का प्रयास किया। 29 सितंबर 2020 में युवती ने दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में दम तोड़ दिया। पुलिस ने युवती के बयान के आधार पर चारों अभियुक्त संदीप, रवि, रामू व लवकुश को गिरफ्तार कर लिया था।
मामले की विवेचना सीबीआई ने की थी। सीबीआई ने चारों अभियुक्तों संदीप, रवि, रामू व लवकुश के खिलाफ आरोपत्र विशेष न्यायाधीश (एससी-एसटी एक्ट) के न्यायालय में दाखिल किया था। सीबीआई ने आरोप पत्र धारा 302, 376 ए, 376 डी, व एससी-एसीटी एक्ट के तहत दाखिल किया था। सीबीआई ने 67 दिनों तक विवेचना की।