भानुप्रताप सिंह बुधवार की सुबह घर पर थे। हादसे की जानकारी पर उनके कुछ रिश्तेदार व गांव के लोग भी उनके यहां आए हुए थे। हादसे के वक्त भानुप्रताप सिंह अपने ट्रैक्टर से आलू के खेत की जुताई करने गए थे। वह कह रहे थे कि काश! मैं जुताई करने नहीं जाता तो हो सकता है मेरी मौजूदगी में यह हादसा ही नहीं होता और मेरी बेटी बच जाती। अब पत्नी के जेल जाने से परिवार पर और परेशानी बढ़ गई। बच्चों के खाने-पीने से लेकर स्कूल भेजने तक की व्यवस्था आशा ही संभालती थी। अब यह दोनों बच्चों की देखभाल उन्हें खुद ही करनी है। वह मवेशी भी पालते हैं और खेतीबाड़ी भी ठीकठाक है। पत्नी के बिना सब काम संभलना उनके लिए बहुत मुश्किल भरा हो सकता है। पत्नी ने ऐसा क्यों किया, इस बात पर वह इतना कहते ही रो पड़े कि कोई मां अपने बच्चे को क्यों मारेगी। बस अनहोनी की बात थी। गलती से माचिस की तीली जल गई और आशा को नहीं पता होगा कि हादसा इतना बड़ा हो जाएगा। हालांकि आशा के झुलसे हाथ इस ओर इशारा कर रहे हैं कि आग बुझाने की उसने काफी कोशिश की होगी। घर में आशा अकेली थी और वह आग पर काबू न पा सकी।
मम्मी हम आपकी हर बात मानेंगे... डरे सहमे हैं बच्चे
गांव में क्या बड़े, क्या बच्चे हर किसी की जुबान पर वंदनी के साथ हुए हादसे की चर्चा है। छोटे बच्चे भी वंदनी के साथ हुए हादसे को लेकर डरे सहमे हैं। मंदिर पर अक्सर शाम के वक्त बच्चे खेलते हुए शोर मचाते थे, लेकिन तीन दिनों से मंदिर पर बच्चे खेलने तक नहीं गए। जहां शाम को बच्चों को शोर रहता था, अब वहां तीन दिनों से सन्नाटा पसरा हुआ है। बच्चे डरे हुए हैं। मोहल्ले की एक महिला ने बताया कि उनकी छह साल की बेटी पिंकी भी वंदनी के साथ खेलती थी। मंगलवार की रात को पिंकी उनके पास आई और बोली कि मां मैं तुम्हारी हर बात मानूंगी। तुम कहोगी तो ही खेलने बाहर जाऊंगी, मुझे वंदनी की तरह जलाकर मत मारना। इतना सुनकर महिला ने बेटी को सीने से लगा लिया और फफककर रो पड़ी। बेटी के दिमाग पर इस हादसे का ज्यादा असर न पड़े, इसे देखते हुए महिला ने उसे समझाते हुए कहा कि कोई मां अपनी बेटी को नहीं मारती। यह महज एक हादसा था।
भानु ने रात में ही पत्नी को भेज दिया था मायके
आग से गंभीर रूप से झुलसी वंदनी को लेकर परिवार के लोग अस्पताल लेकर गए, जहां उसकी मौत हो गई। परिजनों ने पुलिस के पचड़े से बचने के लिए रात में ही करीब 10 बजे वंदनी के शव का अंतिम संस्कार कर दिया। इसके बाद परिजनों ने आशा से काफी कहासुनी की और सभी बार-बार उसे कोस रहे थे। आशा अपनी गलती पर पश्चाताप कर रही थी। वह खुद के साथ अनहोनी की बात कह रही थी। भानुप्रताप सिंह रात में ही पड़ोसी की गाड़ी से आशा को उसके मायके पहुंचा दिया था। उन्हें डर था कि वह कहीं खुद के साथ कोई अनहोनी न कर ले, लेकिन ट्विटर पर हुई शिकायत से घटना का राजफाश हो गया और बेटी को मारने वाली मां आज सलाखों के पीछे पहुंच गई।