हर मंच पर आधी आबादी की हिस्सेदारी की जोरशोर से बात होती है, लेकिन जब बात राजनीति को लेकर की जाए तो स्थिति बदली दिखाई देती है। यहां इस बार विधानसभा चुनाव में फिर राजनीतिक दलों ने महिलाओं पर अविश्वास ही किया है। महज रालोद ने ही इगलास से एक महिला प्रत्याशी को टिकट दिया है। इसके अलावा किसी बड़े राजनीतिक दल ने किसी भी सीट से महिला को चुनाव लड़ने का अवसर नहीं दिया है।
जिले में विधानसभा चुनावों में हर बार महिलाओं को टिकट देने में राजनीतिक दल परहेज करते रहे हैं। इस बार भी ऐसा ही हुआ है। बसपा ने इस चुनाव में किसी महिला को टिकट नहीं दिया। अतरौली से संगीता चौधरी को टिकट दिया भी था, लेकिन बाद में उनका टिकट काट दिया।
इसी तरह भाजपा में भी हर सीट से कई महिलाएं दावेदार थी, लेकिन पार्टी ने किसी भी महिला को टिकट नहीं दिया। सपा-कांग्रेस गठबंधन ने भी किसी महिला उम्मीदवार को मैदान में नहीं उतारा। रालोद ने जरूर इगलास क्षेत्र से डॉ. सुलेखा चौधरी को उम्मीदवार बनाया है। यदि एक नजर डाली जाए तो जिले में बड़े दलों के करीब 30 प्रत्याशी मैदान में हैं, जिसमें से महज एक महिला प्रत्याशी है।
जिले से केवल पांच महिलाएं ही बनीं विधायक
अब तक 16 विस चुनाव हो चुके हैं और यहां की सात सीटों से करीब 150 नेता विस में पहुंच चुके हैं। इसके विपरीत जिले से केवल पांच महिलाएं ही आजादी के बाद विस में पहुंची हैं। इसमें पूर्व प्रधानमंत्री चौ. चरण सिंह की पत्नी गायित्री देवी, उनकी बेटी ज्ञानवती, पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की पुत्रवधू प्रेमलता वर्मा, पूर्व विधायक मलखान सिंह की पत्नी विमलेश के अलावा रामसखी कठेरिया विस चुनावों में निर्वाचित हुई हैं। पिछले विस चुनाव में कोई भी महिला विधायक नहीं चुनी गई थी। वहीं जिले से कोई महिला आज तक मंत्रिमंडल में जगह नहीं पा सकी है।