अलीगढ़ की टॉपर लिस्ट में रोहित कुमार
- फोटो : अलीगढ़ की टॉपर लिस्ट में रोहित कुमार
यूपी बोर्ड का रिजल्ट आने पर मोबाइल में परीक्षा परिणाम देखते समय 10वीं के छात्र रोहित कुमार को कोई को घबराहट नहीं थी, क्योंकि उसने परीक्षा के छह महीने पहले ही अपने रिजल्ट की घोषणा कर दी थी। रोल नंबर डालने के बाद सब्मिट करते ही, जैसे ही रिजल्ट सामने आया, तो रोहित के दोस्त, गुरुजन और परिवार वाले अचंभे में पड़ गए, रोहित के छह महिने पहले बताए हुए 95 प्रतिशत ही उसे मिले और उसने जिले की टॉपर लिस्ट में चौथा स्थान हासिल किया।
छह महिने पहले गुरुजी को लिखकर दे दिया था रिजल्ट
यूपी में अलीगढ़ जनपद के अतरौली कस्बे के सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज के 10वीं के छात्र रोहित कुमार ने अपने सत्र की शुरुआत में ही अपने कक्षा अध्यापक विनादे गुप्ता को सितंबर में ही 95 प्रतिशत अंक लाने का लक्ष्य लिखकर दे दिया था। यूपी बोर्ड के रिजल्ट जारी होते ही रोहित ने 95 प्रतिशत के जादुई आंकड़े को सच कर दिखाया। उन्होंने न सिर्फ अपना कॉलेज टॉप किया बल्कि जिले में चौथी रेंक हासिल की।
लक्ष्य बोध पत्रक में भरे थे 95 प्रतिशत
सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य जगवीर सिंह ने बताया कि स्कूल में हाईस्कूल और इंटर के छात्रों से सितंबर महीने में एक लक्ष्य बोध पत्रक भरवाया जाता है, जिसमें परीक्षा तक के दिनों की संख्या होती है। हर विषय के साथ-साथ परीक्षा में कुल लक्ष्य यानि प्राप्तांक का प्रतिशत भरवाया जाता है। छात्र स्वयं परीक्षा में अपना लक्ष्य प्रतिशत के रुप में लिखता है। उसके बाद छात्र प्रतिदिन उस दिन की तैयारी करता है और उस तारीख को काटता चला जाता है। लक्ष्य बोध पत्रक की एक कॉपी छात्र के पास और एक स्कूल में जमा होती है।
कक्षा 10 के छात्र रोहित कुमार ने बोर्ड परीक्षा से छह महीने पहले सितंबर में लक्ष्य बोध पत्रक में 95 प्रतिशत अंक भरे। उनको बोर्ड परीक्षा में 94.67% यानि 95 प्रतिशत अंक मिले, उन्होंने 600 में से 568 नंबर हासिल किए। रोहित के तीन विषय हिंदी, गणित और विज्ञान में 100 में से 97 नंबर आए। रोहित कहते हैं कि कमरे में अपनी स्टडी टेबल के सामने भी 95 प्रतिशत का टारगेट लिख रखा था। उसी को ध्यान में रखकर तैयारी करता था।
बनना चाहता है इंजीनियर
रोहित कुमार के पिता रामेश्वर दयाल की कपड़े की एक छोटी सी दुकान है। वह तीन भाई-बहन हैं। रोहित ने बताया कि वह इंटर करने के बाद आईआईटी के माध्यम से इंजीनियर बनना चाहता है। रोहित ने बताया कि उसने यह सफलता बिना कोचिंग और टयूशन के प्राप्त की। रोजान 5 से 6 घंटे सेल्फ स्टडी की।