इस शरीर के हिस्से में होती बीमारीडॉ. सिद्दीकी ने कहा कि कार्सिनोमा आमतौर पर सिर, गर्दन और सीने के बीच में होता है, जिसे मिडलाइन कार्सिनोमा कहा जाता था। बाद में यह पता चला कि यह कैंसर फेफड़े, हड्डियों, नाक, ग्रंथियों, केंद्रीय तंत्रिका तंत्र और ऊतकों सहित विभिन्न अंगों में भी होता है। उन्होंने कहा कि इसके उपचार के लिए कोई गाइडलाइन नहीं थी। अब इस कमी को दूर करने के लिए वैज्ञानिक टीम ने कार्सिनोमा के उपचार के लिए यह यह समिति बनाई। टीम में मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट, रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट, सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट, पैथोलॉजिस्ट, नर्स, आणविक जीवविज्ञानी, सांख्यिकीविद् और जैव सूचना विज्ञान विशेषज्ञ शामिल हैं।
कैंसर के क्षेत्र में काम करने पर मिले 42 पुरस्कार
कैंसर के क्षेत्र में काम करने पर डॉ. सिद्दीकी को अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय स्तर पर 42 पुरस्कार मिल चुके हैं। इनमें 2010 में सोसाइटी ऑफ बेसिक यूरोलॉजिक रिसर्च यूएसए से यंग साइंटिस्ट अवार्ड, 2017 में इंडियन एकेडमी ऑफ बायो-मेडिकल साइंसेज से फरहा देबा अवार्ड, 2019 में सोसाइटी ऑफ फार्मास्युटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च से बैंकॉक में इनोवेटिव रिसर्चर ऑफ द ईयर और एएमयू के जूलॉजी विभाग से बेस्ट टीचर अवार्ड-2018 शामिल हैं। उन्हें प्रतिष्ठित सर सैयद इनोवेशन अवार्ड-आउटस्टेडिंग रिसर्चर ऑफ द ईयर 2022 से भी सम्मानित किया गया। थेरेपी-प्रतिरोधी कैंसर पर उनके काम को 2014 में यूएसए के रक्षा विभाग द्वारा तीन “फीचर्ड प्रोस्टेट कैंसर रिसर्च” कार्यों में से एक के रूप में चुना गया।