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अलीगढ़: बॉडी वार्न कैमरे से लैस हुआ जीएसटी सचल दल, लखनऊ से हो रही निगरानी

Wed, 14 Oct 2026 03:17 PM IST
Vijay Singh Pundir आशीष निगम, अमर उजाला, अलीगढ़

सार

राज्य कर विभाग के अलीगढ़ जोन कार्यालय में अलीगढ़, मथुरा, कासगंज, हाथरस और एटा सहित पांच जिले शामिल हैं। वर्तमान में इन जिलों में 10 सचल दल इकाइयां कार्यरत हैं। प्रत्येक इकाई में एक असिस्टेंट कमिश्नर और एक राज्य कर अधिकारी शामिल हैं।
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बॉडी वार्न कैमरे से लैस हुआ जीएसटी सचल दल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जीएसटी की सचल दल इकाइयों को बॉडी वार्न कैमरों से लैस कर दिया गया है। पहले इन कैमरों के जरिये केवल जीपीएस लोकेशन ट्रेस होती थी। हाल ही में इन कैमरों में सिमकार्ड भी डाल दिया गया है। अब लखनऊ मुख्यालय के अधिकारी सचल दल की हर कार्रवाई को ऑनलाइन अपने सिस्टम पर देख रहे हैं। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य सचल दल इकाइयों की कड़ी निगरानी करना है ताकि व्यापारियों को कोई परेशान न कर सके। इसके अलावा सचल दल की कार्रवाई पर भी अंगुली न उठ सके।

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राज्य कर विभाग के अलीगढ़ जोन कार्यालय में अलीगढ़, मथुरा, कासगंज, हाथरस और एटा सहित पांच जिले शामिल हैं। वर्तमान में इन जिलों में 10 सचल दल इकाइयां कार्यरत हैं। प्रत्येक इकाई में एक असिस्टेंट कमिश्नर और एक राज्य कर अधिकारी शामिल हैं। अलीगढ़ शहर में सचल दल की तीन टीमें काम कर रही हैं। सचल दल इकाइयों की प्रवर्तन कार्रवाई से जून से अब तक 269 मामलों में 2.91 करोड़ रुपये की वसूली की गई है। सितंबर महीने में विभाग का राजस्व वसूली लक्ष्य 195.14 करोड़ रुपये था, जिसके सापेक्ष 108.22 करोड़ रुपये की वसूली की गई।

कैमरे ने किया काम, जांच में आरोप फुस्स
जीएसटी की सचल दल इकाई ने रविवार को शहर के सासनीगेट इलाके में एक ई-रिक्शा पर लदे 500 किलो जस्ते को रोक कर जांच की थी। मौके पर इसका पक्का बिल और ई-वे बिल नहीं दिखाने पर माल को तालानगरी कार्यालय ले जाया रहा था। इसका विरोध करते हुए व्यापारी नेता यतेंद्र वाईके की अगुवाई में व्यापारियों ने हंगामा किया। सचल दल इकाई पर 50 हजार रुपये मांगने का आरोप भी लगाया था, जिसकी पुष्टि नहीं हुई। विभाग के एडिश्नल कमिश्नर ग्रेड-वन एकेआर त्रिपाठी ने इसकी जांच कराई। इसमें बॉडी वार्न कैमरों ने पूरी सच्चाई दिखाई। इसके बाद सचल दल की टीम को क्लीनचिट दी गई। व्यापारी और प्रदर्शन करने वाले भी इस संबंध में कोई पुख्ता सबूत नहीं दिखा सके।
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पकड़े जाने पर होती है ये कार्रवाई

  • माल का बिल या ई-वे बिल नहीं होने पर तय टैक्स का दोगुना जमा करना होता है।
  • माल पकड़े जाने के बाद अगर व्यापारी नहीं आए तो 18 फीसदी टैक्स लगता है।
  • बीते कुछ दिनों में ई-रिक्शा पर माल ले जाने के 60 मामलों में अर्थदंड वसूला गया।

यहां चल रही सिस्टम की लेटलतीफी

  • हाईवे के टोल प्लाजा से किसी भी वाहन के निकलने के 20 मिनट बाद पोर्टल पर आती है रिपोर्ट।
  • ऑनलाइन ई-वे बिल बनने के बाद पोर्टल तक आने में पांच से सात मिनट का अंतर आ जाता है।
  • खिरनीगेट मामले में इसी लेटलतीफी से हंगामा हुआ और बिल दिखाने पर मामला शांत हुआ।
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