घटना का जीआरपी ने खुलासा किया कि मृत महेंद्र का बेटा अनुराग पानीपत में मजदूरी करता था। वहां से वह एक विवाहिता को प्रेम संबंधों में अपने गांव ले आया। महिला डेढ़ माह बाद वापस चली गई। पीछे से अनुराग भी पहुंचा। उसे वापस लाने के प्रयास किए। मगर सफल नहीं हुआ। घटना से चार दिन पहले उसने फोन करके अपने पिता को पानीपत बुलाया। फिर महिला से चलने को कहा। जब वह नहीं आई तो घटना वाली शाम ट्रेन में सवार होकर पिता संग गांव के लिए चला आया।
आते समय प्रेमिका व उसके परिवार को मुकदमे में फंसाने की धमकी देकर आया। साथ में पानीपत से शराब, चाकू, चूहे मारने वाली दवा आदि लेकर आया। रात में स्टेशन पर पहले पिता को चूहे मारने वाली दवा मिलाकर शराब पिलाई। बाद में पिता के नशे में होने पर चाकू घोंपकर हत्या कर दी। बाद में प्रेमिका परिवार को फंसाने के लिए यह कहानी सुनाई कि वह लोग उनका पीछा करते हुए आए। यहां पिता की हत्या कर चले गए। घटना के समय वह खाना लेने गया था।
अदालत ने खड़े किए ये सवाल
अदालत ने सभी तरह के फिंगर प्रिंट मिलान न होने पर सवाल किया। दूसरा कोई चश्मदीद साक्षी न होने पर सवाल किया। सिर्फ परिस्थितियों के आधार पर आरोप लगाने को हत्या का आधार नहीं माना। साथ में बेटे द्वारा पिता की हत्या का कोई ठोस कारण भी साबित होना नहीं माना। इस आधार पर सत्र न्यायाधीश अनुपम कुमार की अदालत से उसे बरी कर दिया।