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Anxiety: एएमयू में हुआ अध्ययन, बढ़ती चिंता से बदल रहा किशोरों का खानपान, नाश्ते से दूरी भी पड़ रही भारी

Sun, 12 Apr 2026 01:41 PM IST
Chaman Kumar Sharma अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़

सार

एएमयू के गृह विज्ञान विभाग ने अलीगढ़ में 15 से 19 वर्ष के बीच के 400 किशोरों पर अध्ययन किया। इसमें सामने आया है कि हर तीसरा किशोर अपने जीवन में कभी न कभी चिंता विकार का सामना कर रहा है। 25 फीसदी में उच्च स्तर की चिंता पाई गई।
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बढ़ती चिंता - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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बढ़ती चिंता (एंग्जायटी) किशोरों की मानसिक स्थिति के साथ उनके खानपान और शरीर के वजन बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) पर भी गहरा असर डाल रही है। हर तीसरा किशोर चिंता का शिकार है। सबसे बड़ी समस्या उनके नाश्ते से दूरी बनाने के कारण हो रही है। इससे उनका वजन कम और अधिक होने की समस्या बढ़ रही है।

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इस अध्ययन ने मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के बीच गहरे संबंध को उजागर किया है। किशोरावस्था 10 से 19 वर्ष तक की आयु का वह दौर है, जिसमें शारीरिक और मानसिक विकास तेजी से होता है। इसी दौरान चिंता की समस्या सबसे ज्यादा देखने को मिल रही है, जो आगे चलकर किशोर की जीवनशैली और स्वास्थ्य को प्रभावित करती है।

एएमयू के गृह विज्ञान विभाग ने अलीगढ़ में 15 से 19 वर्ष के बीच के 400 किशोरों पर अध्ययन किया। इसमें सामने आया है कि हर तीसरा किशोर अपने जीवन में कभी न कभी चिंता विकार का सामना कर रहा है। 25 फीसदी में उच्च स्तर की चिंता पाई गई। 18 फीसदी किशोरों में चिंता का स्तर अत्यधिक उच्च है, जिसका असर किशोरों के खानपान पर भी साफ दिखाई दिया।
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32 फीसदी किशोर अक्सर नाश्ता छोड़ देते हैं। 30 फीसदी में कभी-कभी बिंज ईटिंग (एक साथ ज्यादा खाना) की आदत है। 30 फीसदी किशोर दिन में चार बार भोजन करते हैं, जबकि 32 फीसदी से भी अधिक फास्ट फूड का सेवन करते हैं, जिससे बीएमआई में असंतुलन पाया गया।

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एएमयू के गृह विज्ञान विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मरियम फातिमा के निर्देशन में अर्चना कसौंधन ने पांच साल तक यह अध्ययन किया। इसमें पाया गया कि 19 फीसदी किशोरों का वजन कम है तो 19 फीसदी का ज्यादा है। 40 फीसदी सामान्य हैं। 22 फीसदी मोटापे के शिकार हैं। असंतुलित खानपान और मानसिक तनाव सीधे वजन पर असर डाल रहे हैं।
चिंता और वजन का गहरा संबंध अध्ययन में यह भी सामने आया है। इसमें भी चिंता के कई आयाम जैसे अपराधबोध, आत्म-नियंत्रण, परिपक्वता और तनाव का बीएमआई से सीधा संबंध है। यानी जितनी अधिक चिंता, उतनी अधिक संभावना वजन में गड़बड़ी की है। अलीगढ़ जैसे शहरों में भी यह समस्या तेजी से उभर रही है, जिसे नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है।-प्रो. सबा खान, अध्यक्ष, गृह विज्ञान विभाग एएमयू

यह भी जानें
  • 25 फीसदी किशोरों में चिंता का स्तर उच्च पाया गया
  • 18 फीसदी किशोरों में चिंता का स्तर उच्च से भी अधिक
  • 32 फीसदी किशोर छोड़ दे रहे हैं सुबह का नाश्ता
  • 35 फीसदी किशोरों को एक साथ ज्यादा खाने की आदत
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