अलीगढ़ महानगर के बन्नादेवी क्षेत्र के सिद्धार्थ नगर चूहरपुर में 500 रुपये के लिए अपने दादा की गला दबाकर हत्या करने के दोषी सचिन को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। यह निर्णय एडीजे पांच रवीश कुमार अत्री की अदालत ने सुनाया है। साथ में 20 हजार रुपये का अर्थदंड भी नियत किया है।
खास बात है कि मुकदमे में वादी सहित परिवार के सभी गवाह गवाही से मुकर गए, जिन्हें अदालत ने पक्षद्रोही घोषित किया। एक चचेरी बहन की गवाही सजा का आधार बनी है। अभियोजन पक्ष के अनुसार यह घटना एक मार्च 2018 की है। मूल रूप से गांव ईशनपुर निवासी सुशील कुमार ने बन्ना देवी थाने में तहरीर देकर बताया कि उनका परिवार सिद्धार्थ नगर चूहरपुर में रहता है। घटना वाली शाम को वह गांव में मंदिर पर पूजा करने गए थे, तभी उन्हें उनकी मां व बेटे ने यह खबर दी कि उनके भतीजे यानी बड़े भाई के बेटे सचिन ने उनके पिता गंगा सहाय की गला दबाकर हत्या कर दी है।
मुकदमे में यह भी आरोप लगाया कि वह जुआ खेलने का आदी है। उसने जुए में रुपये हारने पर अपने दादा से 500 रुपये मांगे थे। जब उन्होंने देने से मना कर दिया तो वह दादा-दादी से झगड़ा करने लगा। इसी बीच उसने दादा की हत्या कर दी। बीच बचाव में वह दादी पर भी हमलावर हुआ, मगर बाद में भाग गया। खबर पर पहुंची पुलिस ने आरोपी सचिन को मोहल्ले से ही दबोच लिया। मुकदमे के आधार पर चार्जशीट दायर की। इस मामले में सत्र परीक्षण में खुद वादी, उसका बेटा व दूसरे भाई की भतीजी गवाही के समय मुकर गए। सभी ने खुद को घटनास्थल पर न होना बताया, मगर दूसरी भतीजी ने अपने तहेरे भाई के खिलाफ दादा की हत्या के संबंध में गवाही दी, जिसके आधार पर अदालत ने सचिन को दोषी करार देकर सजा सुनाई है।
बुजुर्ग ने की थीं दो शादियां
अभियोजन अधिवक्ता एडीजीसी तरुण वर्मा ने बताया कि न्यायालय में सत्र परीक्षण में यह उजागर हुआ कि मृत बुजुर्ग की दो शादियां हुईं थीं। पहली पत्नी से एक बेटा व दूसरी पत्नी से दो बेटे हुए। सभी परिवार अगल-बगल में रहते हैं। आरोपी सचिन पहली पत्नी के बेटे का बेटा है।