सूत्रों के अनुसार दिल्ली के हैकर सरगना द्वारा साजिद को हर दिन कम से कम 50 आधार कार्ड बनाने का लक्ष्य मिलता था। उसका साफ कहना था कि कम से कम 30 व अधिकतम 50 आधार कार्ड ग्राहक तलाशकर उनके आधार कार्ड बनवाओगे तो काम चलेगा। इस पर साजिद अपने नेटवर्क के जरिये अपने जिले के साथ-साथ पश्चिमी यूपी के आसपास के जिलों के लोगों तक के आधार कार्ड बनाता था।
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सरगना खोलेगा राज..कितने राज्यों में फैला जाल
सरकारी साइटों को हैककर आधार कार्ड बनाने वाले गिरोह द्वारा किए गए फर्जीवाड़े से जुड़े बहुत से सवाल उजागर होने हैं। सबसे पहला सवाल तो यही है कि गिरोह के दिल्ली वाले सरगना आकाश ने कितने राज्यों में अपना नेटवर्क बना रखा था। इसके लिए पुलिस व एटीएफ टीमें आकाश सहित जेल गए जनसेवा केंद्र संचालकों के अलीगढ़ निवासी फरार साथियों की तलाश में जुटी हैं। जेल गए दोनों आरोपियों के मोबाइलों की सीडीआर से मदद ली जा रही है, ताकि फरार तीनों की लोकेशन मिल सके।
सीओ तृतीय सर्वम सिंह बताते हैं कि गिरोह का सरगना दिल्ली निवासी आकाश, अलीगढ़ के शरद व अमित फरार हैं। उनके पकड़े जाने पर काफी कुछ उजागर होगा। अभी तक उजागर हुआ कि आकाश द्वारा उत्तराखंड व झारखंड सरकार की आधार कार्ड बनाने वाली डिपार्टमेंट ऑफ वीमेंस एंड चाइल्ड वेलफेयर की साइटों को हैककर उन्हें एक्सिस दिया जाता था। संदेह है कि इनके द्वारा पश्चिम बंगाल व गुजरात सहित अन्य कई राज्यों की साइटों को भी हैक की गई होंगी। यह भी उजागर हुआ कि अमित व शरद पहले खुद आधार कार्ड बनाते थे, बाद में आकाश के जरिये ही साजिद के संपर्क में आए, जिनकी तलाश में टीमें लगी हैं।
ऐसे बनाते थे कूटरचित आधार कार्ड
आधार कार्ड बनाने के लिए सबसे पहले आवेदक के जन्म या मूल निवास प्रमाणपत्र की जरूरत होती है। यह पहले साइटों को हैक कर छदम नाम, पते या जिस नाम से आवेदक बनवाना चाहें, उस नाम-पते से मूल निवास या जन्म प्रमाणपत्र बनाते थे। इसके लिए इन्हें पार्षद, स्कूल, अस्पताल तक के अधिकृत हस्ताक्षर व मुहर की जरूरत होती थी, वे सब इनके पास थे। प्रमाण पत्र बनने के बाद उसे आधार कार्ड बनाने में प्रयोग करते थे।