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गांवों तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने पर शासन का जोर

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महामारी के विकट समय में ग्रामीण झोलाछाप के भरोसे हैं। स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर खानापूर्ति हो रही है। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद शासन का जोर गांवों तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने का है। उसके बाद अधिकारी भी सक्रिय हुए हैं।
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13 मई को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अलीगढ़ आए थे। उस समय जन प्रतिनिधियों ने ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति से अवगत कराया था। यह भी शिकायत हुई थी कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर खानापूर्ति हो रही है। सीएचसी एवं पीएचसी पर भी पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।
ओपीडी बंद कर दिए गए हैं। ग्रामीण झोलाछाप के भरोसे है। गलत उपचार से जान भी गवा रहे हैं। गजनीपुर में एक ही परिवार के चार लोग जान गवा चुके हैं। पला एसई में भी एक ही परिवार के चार लोगों की मृत्यु हुई है।
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चंद रोज पहले कलेक्ट्रेट में आयोजित बैठक में भी किट वितरण के नाम पर खानापूर्ति एवं ग्रामीण क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर जन प्रतिनिधियों ने सवाल उठाया था। शनिवार को अपर मुख्य सचिव अमित मोहन प्रसाद का भी पत्र भी आ गया है, जिसमें ग्रामीण क्षेत्र की स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने का निर्देश दिया गया है।
- जिला मुख्यालय में बैठे अधिकारियों को ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर जमीनी हकीकत समझने की जरूरत है। दुर्भाग्य से अधिकारियों ने धरातल पर जाकर स्थिति को समझने का प्रयास नहीं किया। मुख्यमंत्री तक बात पहुंचने के बाद अधिकारी सक्रिय हुए हैं। अभी मुख्यमंत्री गांवों पर फोकस बनाए हुए हैं।
- अनिल पाराशर, भाजपा विधायक
कोरोना का लक्षण होने पर ग्रामीणों को दी जा रही किट
कोरोना का लक्षण होने पर ग्रामीणों को किट दी जा रही है। किट में पैरोसिटामोल, डॉक्सी, एजिथ्रोमाइसिन, आईवरमेक्टिन, विटामिन सी, जिंक, विटामिन डी थ्री आदि हैं। सीएमओ डॉ. बीपी सिंह कल्याणी ने बताया कि अभी तक जनपद में 35 से 40 हजार लोगों को दवा किट का वितरण किया गया है।
लखनऊ से अब प्रिंटेट पंपलेट भी आ गए हैं। किट के साथ मरीजों को पंपलेट दिया जाएगा, जिसमें कोरोना का लक्षण होने पर किस तरह की सावधानी बरतनी है, उसकी जानकारी दी गई है। उन्होंने बताया कि आशा बीमार लोगों को किट देती है और यह भी बताती है कि दवा कब व कैसे खाना है।
बुखार होने पर आइसोलेट हो जाएं
सीएमओ डॉ. बीपी सिंह ने कहा कि बुखार या कोरोना का लक्षण होने पर घर में आइसोलेट हो जाएं। कोरोना की जांच कराएं और रिपोर्ट आने पर परिवार या किसी भी व्यक्ति के संपर्क में न आएं। खाने-पीने के बर्तन अलग कर लें। अलग शौचालय का प्रयोग करें। यदि घर में एक ही शौचालय है तो संदिग्ध मरीज सबसे बाद में प्रयोग करें।
परिवार के सदस्य शौचालय को सैनिटाइज करने के बाद इस्तेमाल करें। आशाओं के पास ऑक्सी मीटर उपलब्ध रहता है। मरीज ऑक्सीजन के स्तर पर नजर रखें। सांस लेने में दिक्कत या किसी अन्य तरह की परेशानी हो तो तुरंत अस्पताल में भर्ती हो जाए। सरकारी अस्पताल में कोरोना की नि:शुल्क जांच एवं उपचार की सुविधा है।
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अपर मुख्य सचिव का निर्देश
- सीएचसी, पीएचसी पर ओपीडी कोविड प्रोटोकॉल के तहत चलाएं
- सीएचसी, पीएचसी की रंगाई-पुताई एवं समस्त उपकरण चालू हालत में लाएं
- सीएचसी, पीएचसी पर चिकित्सक एवं पैरा मेडिकल स्टॉफ की उपस्थिति सुनिश्चित करें
- डॉक्टरों की ड्यूटी आईसीसीसी में लगाने से परहेज करें
- सीएचसी, पीएचसी पर एंटीजन टेस्टिंग की सुविधा उपलब्ध कराएं
- लोगों को आवश्यक दवाईयां उपलब्ध कराएं
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