जब से मदरसा चाचा नेहरू में मंदिर निर्माण की बात पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी की पत्नी सलमा अंसारी ने कही है, तब से उनका यह फैसला बहस का मुद्दा बना है। कई लोगों ने मदरसे में मंदिर निर्माण के फैसले के पीछे फंडिंग की जांच से डरने का आरोप लगाया गया है। दूसरी ओर सलमा अंसारी इन सभी आरोपों से इंकार किया। उनका कहना है कि इस मदरसे में काफी समय से शिव जी व हनुमान जी के चित्र लगे हुए हैं और गायत्री मंत्र का पाठ होता है।
मैं किसी भी तरह के आरोपों की परवाह नहीं करती। जो देश व समाज हित में होता है, वैसा ही काम करती हूं। मंदिर-मस्जिद का निर्माण दो महीने में पूरा होगा। मदरसे में काफी समय से एक कमरे में नमाज व पूजा होती चली आ रही है। मदरसे में कुरान की आयतें व गायत्री मंत्र की गूंज सुनाई देती है। आरोप लगाने वाले केवल सुर्खियों में रहना चाहते हैं।
-सलमा अंसारी, संचालिका मदरसा चाचा नेहरू
मदरसे में मंदिर निर्माण का फैसला नासमझी में उठाया गया कदम है। मदरसे में कोई भी इबादतगाह नहीं बननी चाहिए। इसकी जरूरत बिल्कुल नहीं है, जिसे इबादत करनी है वह अपने घर में कर सकता है। मदरसे में नाबालिग बच्चे पढ़ते हैं, उन्हें उनके माता-पिता से इजाजत लेकर ही धार्मिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेने देना चाहिए।
- मुफ्ती मोहम्मद जाहिद खान, सुन्नी थियोलॉजी एएमयू
सलमा अंसारी अपने मदरसे में मंदिर बनाने की जो बात कही है, वह नौटंकी है। मंदिर की आड़ में हिंदू भाइयों को गुमराह करने की कोशिश की जा रही है। सलमा अंसारी किसी बात से डरी हुई हैं। कुछ बड़ा गोलमाल है, जिसे साधने की कोशिश है। हिंदू संगठन ने पिछले दिनों फंडिंग की जांच कराने की बात कही है। हो सकता है इससे बचना चाह रहीं हों।
- चौ. इफराहीम हुसैन, अध्यक्ष, भारतीय समाज सेवक संघ